जालौन की पांचों तहसीलों में उड़नदस्ते गठित, गौशालाओं तक पहुंचाई जाएगी पराली
संवाददाता
उरई/जालौन।
खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जालौन जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिलाधिकारी समीर ने जिले की पांचों तहसीलों उरई, कालपी, कोंच, जालौन और माधौगढ़ में उड़नदस्ते गठित किए हैं। पराली जलाने पर संबंधित किसान से क्षतिपूर्ति की वसूली के साथ नियमानुसार अर्थदंड की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, संबंधित क्षेत्र में पराली जलाने की घटना होने पर लेखपाल की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
धान की कटाई से गेहूं की बुवाई तक होगी निगरानी
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण सेल का गठन किया गया है। यह सेल धान की कटाई से लेकर गेहूं की बुवाई तक प्रतिदिन निगरानी करेगा, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
तहसील और विकासखंड स्तर पर लेखपालों तथा ग्राम प्रधानों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाएंगे। इनके माध्यम से पराली जलाने की किसी भी घटना की सूचना तत्काल संबंधित उड़नदस्ते तक पहुंचाई जाएगी, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
गौशालाओं में पहुंचाई जाएगी पराली
प्रशासन की ओर से पराली के उचित निस्तारण के लिए इसे गौशालाओं तक पहुंचाने और खेतों में पराली विघटक के माध्यम से अवशेषों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही कंबाइन हार्वेस्टर से फसल की कटाई के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
किसानों को जागरूक करने के लिए चलेगा अभियान
पराली जलाने से होने वाले नुकसान और उसके उचित निस्तारण के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों और शिक्षण संस्थानों में अभियान चलाया जाएगा। जिला प्रशासन का उद्देश्य फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना, पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाना और पराली जलाने की घटनाओं को नियंत्रित करना है।