संवाददाता, उरई/जालौन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (1 मई 2026) के अवसर पर जन शिक्षण संस्थान, जालौन के सभागार में विधिक साक्षरता एवं श्रमिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान तथा भारतीय जीवन बीमा निगम का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों एवं सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सचिव/अपर जिला जज (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) मा० शाम्भवी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्य के अनुसार श्रमिक है। उन्होंने श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विकास अधिकारी, एलआईसी जालौन श्री एस.एस. राजावत ने श्रमिकों को भारतीय जीवन बीमा निगम की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेहनती नागरिक ही किसी देश के विकास की आधारशिला होते हैं। साथ ही प्रतिभागियों को स्वरोजगार एवं ‘बीमा सखी’ योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित स्थायी लोक अदालत के न्यायिक सदस्य श्री रामबाबू निषाद ने अपने संबोधन में श्रमिक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना 1919 में की गई थी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्थान निदेशक श्री कन्हैया लाल वैश्य ने मई दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1886 में शिकागो (अमेरिका) में 8 घंटे कार्य दिवस की मांग को लेकर हुए श्रमिक आंदोलन के सम्मान में 1 मई को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित किया गया। भारत में इसकी शुरुआत वर्ष 1923 में चेन्नई से हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की प्रस्तुति दी गई। साथ ही श्रमिकों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
अतिथियों द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा श्रमिक दिवस पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, समाजसेवियों एवं जन शिक्षण संस्थान के स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बड़ी संख्या में प्रशिक्षिकाएं, प्रतिभागी, युवक-युवतियां एवं अभिभावक कार्यक्रम में उपस्थित रहे।