कृषि व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत पर नोडल अधिकारी की पैनी नजर, हाईटेक नर्सरी से लेकर फार्म तक किया व्यापक निरीक्षण

गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार पर जोर—किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के दिए निर्देश
संवाददाता, उरई/जालौन

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी एवं सचिव (कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग) इन्द्र विक्रम सिंह ने जनपद जालौन में कृषि एवं उससे जुड़े विभिन्न संस्थानों का सघन निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने हाईटेक नर्सरी बोहदपुरा, भेड़-बकरी प्रजनन केंद्र, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के कार्यालय, उप कृषि निदेशक कार्यालय एवं कृषि फार्म का भ्रमण किया।

हाईटेक नर्सरी बोहदपुरा के निरीक्षण के दौरान बताया गया कि यह नर्सरी मेसर्स राजदीप एग्रीप्रोडक्ट्स प्रा. लि. द्वारा लगभग 1.09 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की गई है। यहां बैंगन, टमाटर, मिर्च, बंदगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी सहित कद्दूवर्गीय सब्जियों के पौधे सोइललेस तकनीक से तैयार किए जाते हैं।

नोडल अधिकारी ने अत्याधुनिक सीड सोइंग, अंकुरण एवं हार्डनिंग चैंबर की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझा। अधिकारियों ने बताया कि स्वचालित सीड सोइंग मशीन प्रति घंटे लगभग 10 हजार बीज बोने में सक्षम है, जबकि अंकुरण चैंबर में एक लाख तक पौधे एक साथ तैयार किए जा सकते हैं। हार्डनिंग चैंबर में पौधों को खेतों में रोपण योग्य बनाया जाता है।

हाईटेक नर्सरी में विद्युत कनेक्शन न होने के कारण संचालन प्रभावित होने पर नोडल अधिकारी ने तत्काल विद्युत कनेक्शन हेतु डिमांड लेटर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को शीघ्र लाभ मिल सके। उन्होंने इस आधुनिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे किसानों को रोगमुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाली पौध उपलब्ध होगी, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी।

इसके बाद उन्होंने भेड़-बकरी प्रजनन केंद्र का निरीक्षण किया, जहां नाली, मुजफ्फरनगरी एवं मगरा नस्ल की भेड़ों तथा बरबरी नस्ल की बकरियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने पशुपालन को आय वृद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इसके विस्तार पर जोर दिया।

नोडल अधिकारी ने उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के परियोजना कार्यालय एवं बीज विधायन संयंत्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने गोदाम में भंडारित मूंगफली, तिल एवं सांवा बीजों के रख-रखाव की समीक्षा करते हुए साफ-सफाई एवं सुव्यवस्थित भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज समय पर उपलब्ध हो सकें।

उप कृषि निदेशक कार्यालय के निरीक्षण में उन्होंने अभिलेखों के सुव्यवस्थित रख-रखाव, योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट तथा किसानों को दी जा रही सेवाओं में पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यालय को किसानों के लिए समाधान केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए।

अंत में कृषि फार्म के निरीक्षण के दौरान उन्होंने झाड़ियों की तत्काल सफाई कराने तथा फार्म को मॉडल फार्म के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए उन्हें नियमित रूप से फार्म भ्रमण कराया जाए।

नोडल अधिकारी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता और तकनीकी विस्तार के माध्यम से ही किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज अवस्थी, डीसी मनरेगा रामेन्द्र सिंह, उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम, परियोजना अधिकारी बीज विकास निगम सुनील कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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