अधिकारियों को निर्देश—मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को सुनें, शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान करें
संवाददाता
उरई/जालौन।
तहसील उरई के सभागार में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी समीर और पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं। इस दौरान कुल 48 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 12 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों को संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यकतानुसार मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को सुनें। इसके बाद तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए, ताकि फरियादियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
फार्मर रजिस्ट्री से लेकर इलाज तक के दिए निर्देश
समाधान दिवस में ग्राम पाठक निवासी विजय लक्ष्मी ने फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनने की समस्या उठाई। इस पर जिलाधिकारी ने उप कृषि निदेशक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद उनकी फार्मर रजिस्ट्री बनवाई गई।
वहीं, सिविल लाइन निवासी प्रिया सोनी ने विरासत संबंधी प्रकरण प्रस्तुत किया। जिलाधिकारी ने तहसीलदार को संबंधित न्यायालय की पत्रावली मंगवाकर उसका परीक्षण करने और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
चुर्खी बाईपास निवासी करीब 75 वर्षीय विजय सिंह ने बताया कि उनका बेटा छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया है। उपचार के बाद भी उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में ग्राम सरसोखी निवासी रामकृष्ण शुक्ला ने अतिवृष्टि से फसल खराब होने पर मुआवजे की मांग की। इस पर तहसीलदार ने बताया कि फसल क्षति का आकलन कर स्वीकृति की कार्रवाई की जा चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुआवजे की राशि किसान के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
शिकायतकर्ताओं को मिले वास्तविक राहत
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनशिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि पीड़ितों को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने, पारदर्शिता बनाए रखने और शिकायतों के निस्तारण में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप कुमार, उप जिलाधिकारी उत्तम तिवारी, क्षेत्राधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एचएन प्रसाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।