सांकेतिक भाषा से मूक-बधिरों से संवाद का पुलिसकर्मियों को दिया प्रशिक्षण

पुलिस लाइन माती में आयोजित कार्यशाला में दिव्यांगजनों की समस्याओं को समझने और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने पर जोर

संवाददाता / कानपुर देहात

कानपुर देहात। अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर बुधवार को पुलिस लाइन माती, कानपुर देहात में कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक आलोक प्रसाद के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना रहा।

मूक-बधिर व्यक्तियों से संवाद का दिया प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के माध्यम से मूक-बधिर एवं अन्य दिव्यांगजनों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि किसी मूक-बधिर व्यक्ति की शिकायत अथवा समस्या को समझते समय संवेदनशीलता और धैर्य के साथ संवाद स्थापित करना आवश्यक है, ताकि संबंधित व्यक्ति को समय पर आवश्यक पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया तथा आवश्यकता पड़ने पर मूक-बधिर व्यक्तियों के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी गई।

पुलिस सेवाओं को अधिक सुगम और समावेशी बनाने पर जोर

कार्यशाला में दिव्यांगजनों की समस्याओं को समझने, उनकी शिकायतों को प्रभावी ढंग से सुनने तथा पुलिस सेवाओं को उनके लिए अधिक सुगम, संवेदनशील एवं समावेशी बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

प्रशिक्षकों ने पुलिसकर्मियों को बताया कि सांकेतिक भाषा की जानकारी होने से मूक-बधिर व्यक्तियों को अपनी समस्या एवं आवश्यकता बताने में सहायता मिलेगी और पुलिसकर्मी उनकी बात को बेहतर तरीके से समझकर आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।

प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

इस अवसर पर सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण प्रदान करने वाले प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में प्रतिसार निरीक्षक प्रेमचन्द्र शुक्ला सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस सेवाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए सहज, संवेदनशील और सुलभ बनाना है। सांकेतिक भाषा की जानकारी से पुलिसकर्मी मूक-बधिर एवं दिव्यांगजनों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझकर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में अधिक सक्षम होंगे।

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