भीषण गर्मी में जल संरक्षण की मिसाल बना मल्हानपुरा, जल-तारा हरवा-नरवा मॉडल से भूजल संवर्धन को मिली नई दिशा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने किया निरीक्षण, जल सहेलियों का बढ़ाया उत्साह; जनपद में 1 हजार जल तारा निर्माण का लक्ष्य, 150 पूर्ण

संवाददाता | उरई/जालौन

भीषण गर्मी के बीच जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन की दिशा में जनपद जालौन का ग्राम मल्हानपुरा एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। विकासखंड रमपुरा के इस गांव में चार जल-तारा हरवा-नरवा संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण की दिशा में प्रभावी पहल की गई है।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने ग्राम मल्हानपुरा पहुंचकर जल तारा संरचनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया तथा इनके निर्माण एवं रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही जल सहेलियों के कार्यों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि जल तारा केवल एक संरचना नहीं, बल्कि भविष्य के जल संकट से निपटने का टिकाऊ और प्रभावी समाधान है। इसके माध्यम से वर्षा जल को संरक्षित कर भूगर्भ में पहुंचाया जाता है, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होने के साथ-साथ जलभराव एवं मृदा अपरदन जैसी समस्याओं में भी कमी आती है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और जल सहेलियां इस दिशा में अनुकरणीय कार्य कर रही हैं।

पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जल सहेलियों के प्रयास न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अमूल्य धरोहर सिद्ध होंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों को जल संकट से सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

परमार्थ संस्था के सहयोग से वीबीजी राम जी योजना के अंतर्गत जनपद में कुल 1,000 जल तारा संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 150 जल तारा संरचनाएं तैयार की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर उसे धरती में समाहित किया जा रहा है, जिससे भूजल भंडार के पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है।

निरीक्षण के दौरान जल सहेलियों ने अधिकारियों को जल तारा की कार्यप्रणाली, रखरखाव एवं इसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित सफाई, सिल्ट हटाने, फिल्टर परतों की जांच तथा जल प्रवाह की निगरानी के माध्यम से इन संरचनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखा जा सकता है।

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से “जल है तो कल है” की भावना के साथ वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जल तारा जैसी संरचनाएं भविष्य की जल सुरक्षा की मजबूत आधारशिला साबित होंगी।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख रमपुरा अजीत सिंह सेंगर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एच.एन. प्रसाद, उपजिलाधिकारी विनय कुमार मौर्य, डीसी मनरेगा रामेन्द्र सिंह, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, डीडीओ प्रशांत पाण्डेय, परमार्थ संस्था के संजय कुमार एवं वरुण सिंह सहित बड़ी संख्या में जल सहेलियां उपस्थित रहीं।

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