बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत नवजात बालिकाओं का सम्मान, बाल संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण पर किया गया जागरूक
संवाददाता | कानपुर देहात
जिलाधिकारी कपिल सिंह के निर्देश एवं मुख्य विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में मंगलवार को जिला प्रोबेशन अधिकारी की उपस्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवीपुर (मलासा) में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 08 नवजात बालिकाओं का केक काटकर स्वागत किया गया तथा उनकी माताओं को बेबी केयर किट वितरित की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती रेनू यादव ने महिलाओं एवं पुरुषों से बेटा-बेटी में किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने की अपील की। उन्होंने बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने, उन्हें समान अवसर प्रदान करने तथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। साथ ही मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के पात्र लाभार्थियों के अधिक से अधिक आवेदन कराने पर भी जोर दिया।
इसके उपरांत विकास खंड मलासा के सभागार में खंड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में ब्लॉक बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की द्वितीय त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में खंड विकास अधिकारी एवं नायब तहसीलदार ने विकास खंड के सभी केंद्रों से उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की शपथ दिलाई तथा उन्हें अपने-अपने केंद्रों पर भी यह शपथ दिलाने के लिए प्रेरित किया।
जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 एवं नियमावली-2016 के तहत बच्चों के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की जानकारी दी। प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी ने बताया कि ग्राम स्तर पर गठित ग्राम बाल संरक्षण समितियों के माध्यम से सभी परिवारों को बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
जिला प्रोबेशन कार्यालय के जिला मिशन समन्वयक ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जागरूकता संबंधी पंपलेट एवं पोस्टर वितरित किए।
कार्यक्रम एवं बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी, खंड विकास अधिकारी मलासा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मलासा, नायब तहसीलदार भोगनीपुर, एडीओ (आईएसबी), प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी, खंड शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि, संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत), जिला मिशन समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता, बीएमएम, सुपरवाइजर, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, आशा बहुएं तथा बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।