सेवा संकल्प अभियान में सामने आईं सफलता की तस्वीरें, ऋण, टूल किट और सहायक उपकरण बने रोजगार का सहारा
संवाददाता / उरई-जालौन
सेवा संकल्प अभियान के तहत जनपद जालौन में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिले ऋण, आधुनिक टूल किट, मशीनों और सहायक उपकरणों ने कई लोगों को अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर दिया है। किसी ने ऋण लेकर व्यवसाय शुरू किया तो किसी ने आधुनिक उपकरणों की मदद से अपने पारंपरिक कारोबार को आगे बढ़ाया।
दिव्यांगजनों के लिए पेंशन, स्वरोजगार हेतु ऋण और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की योजनाओं का लाभ भी पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। इन योजनाओं के जरिए लाभार्थी अपनी क्षमता के अनुसार स्वरोजगार से जुड़कर आजीविका चलाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
टेंट व्यवसाय से 26 से 29 हजार रुपये मासिक आय
ग्राम कूदईया निवासी 30 वर्षीय शिशुपाल सिंह को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2023-24 में पांच लाख रुपये का ऋण मिला। उन्होंने इस धनराशि का उपयोग टेंट व्यवसाय के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने में किया। कारोबार को आगे बढ़ाने के बाद वर्तमान में वह करीब 26 से 29 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर रहे हैं।
आधुनिक चाक और भट्टी से बढ़ा माटीकला कारोबार
आटा निवासी 31 वर्षीय विचित्र वत्स ने मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत दो लाख रुपये का ऋण लेकर इलेक्ट्रिक चाक और भट्टी खरीदी। आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल से उनके माटीकला व्यवसाय को गति मिली। वर्तमान में वह इससे करीब 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर रहे हैं।
पांच लाख रुपये के ऋण से शुरू किया तेलघानी उद्योग
ग्राम सामी निवासी मीना देवी ने मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत पांच लाख रुपये का ऋण लेकर तेलघानी उद्योग शुरू किया। स्वरोजगार के इस प्रयास से उन्होंने अपना व्यवसाय खड़ा किया और वर्तमान में करीब 18 से 22 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर रही हैं।
टूल किट ने बढ़ाया उत्पादन, आय में भी हुआ इजाफा
टीहर निवासी दीपक वर्मा को टूल किट्स योजना के तहत निःशुल्क दौना-पत्तल मशीन उपलब्ध कराई गई। मशीन मिलने से उनकी उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई और मासिक आय भी बढ़कर 19 से 24 हजार रुपये तक पहुंच गई।
इसी तरह मुसमरिया निवासी किशन प्रजापति को मुख्यमंत्री माटीकला टूल किट्स योजना के तहत निःशुल्क विद्युत चाक उपलब्ध कराया गया। आधुनिक उपकरण मिलने से उनके पारंपरिक माटीकला व्यवसाय को गति मिली और अब वह करीब 9 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर रहे हैं।
दिव्यांगजनों को भी मिला स्वरोजगार का सहारा
सरकारी योजनाओं का लाभ दिव्यांगजनों तक भी पहुंच रहा है। राजकुमार, सागर और कमला को दिव्यांग पेंशन के साथ दुकान निर्माण/संचालन योजना के तहत 10-10 हजार रुपये का ऋण और स्मार्ट केन का लाभ मिला। इसके सहारे उन्होंने खोखा-गुमटी शुरू कर स्वरोजगार अपनाया और अपनी आजीविका चलाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
वहीं 100 प्रतिशत दिव्यांग सुनील कुमार को दिव्यांग पेंशन के साथ 10 हजार रुपये का ऋण और निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई गई। इसके माध्यम से वह खोखा-गुमटी का संचालन कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
सरकारी सहायता और मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
लाभार्थियों की ये सफलता की कहानियां सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता और उनके हुनर एवं मेहनत के मेल को सामने लाती हैं। ऋण, मशीन, टूल किट और सहायक उपकरण जैसे संसाधनों ने लाभार्थियों को अपने पारंपरिक कौशल के साथ स्वरोजगार शुरू करने अथवा मौजूदा व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सामने आ रही ये कहानियां जनपद में सरकारी योजनाओं से लाभान्वित लोगों की स्थिति और उनके स्वरोजगार से जुड़ने की तस्वीर पेश कर रही हैं। लाभार्थियों की आय के आंकड़े बताते हैं कि योजनाओं से मिले संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने अपनी आजीविका के साधन विकसित किए हैं।