मूक-बधिर व्यक्तियों की समस्याओं को समझने के लिए पुलिसकर्मियों ने सीखी सांकेतिक भाषा

अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर पुलिस लाइन्स उरई में आयोजित हुई एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

संवाददाता / उरई/जालौन

उरई। अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर बुधवार को पुलिस लाइन्स उरई में अपर पुलिस अधीक्षक जालौन की अध्यक्षता में एक दिवसीय सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मूक-बधिर व्यक्तियों एवं बच्चों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित करने के लिए सांकेतिक भाषा का व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना रहा।

कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि ड्यूटी के दौरान किसी मूक-बधिर व्यक्ति अथवा बच्चे से सामना होने पर उसकी बात एवं समस्या को समझने के लिए संवेदनशीलता के साथ सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया जाए। प्रशिक्षण में सांकेतिक भाषा के माध्यम से बातचीत करने, आवश्यक जानकारी प्राप्त करने तथा संबंधित व्यक्ति की समस्या को समझने के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

संवाद में धैर्य और सहज व्यवहार को बताया महत्वपूर्ण

प्रशिक्षकों ने पुलिसकर्मियों को बताया कि मूक-बधिर व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित करते समय धैर्य एवं सहज व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण है। सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद होने पर ऐसे व्यक्तियों को अपनी शिकायत, परेशानी अथवा आवश्यकता पुलिस के समक्ष रखने में सुविधा मिल सकती है।

कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को विभिन्न सामान्य संकेतों एवं उनके अर्थों से परिचित कराया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षण को व्यवहारिक बनाने के लिए पुलिसकर्मियों से सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद का अभ्यास भी कराया गया।

प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पुलिस सेवा में समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ समान संवेदनशीलता एवं सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए। मूक-बधिर व्यक्तियों के सामने आने वाली संवाद संबंधी कठिनाइयों को समझते हुए पुलिसकर्मी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में सक्षम बनें, इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की समस्याओं को समझकर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना भी पुलिस का दायित्व है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी एवं कौशल को ड्यूटी के दौरान व्यवहार में लाने का आह्वान किया।

कार्यशाला के माध्यम से पुलिसकर्मियों को मूक-बधिर व्यक्तियों एवं बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए आवश्यक जानकारी और व्यवहारिक कौशल प्रदान किया गया। इससे पुलिस एवं समाज के इस महत्वपूर्ण वर्ग के बीच संवाद को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने की दिशा में सहायता मिलेगी।

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