संवाददाता, उरई/जालौन |
जनपद जालौन में संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में वर्ष 2026 की बाढ़ प्रबंधन कार्ययोजना को लेकर फ्लड स्टियरिंग ग्रुप की बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय से तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना, नोडल अधिकारियों की तैनाती, चेतावनी प्रणाली, राहत एवं बचाव कार्य, नाव-मोटरबोट एवं गोताखोरों की उपलब्धता, जल निकासी के लिए पंपों की व्यवस्था सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि 15 मई तक आवश्यक सामग्रियों की निविदाएं पूर्ण कर ली जाएं। अपर जिलाधिकारी के नियंत्रण में जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहां 24 घंटे तीन पालियों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी तथा टोल फ्री नंबर भी जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बेतवा नहर प्रखंड प्रथम उरई कार्यालय में 15 जून से 15 अक्टूबर तक पृथक बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित किया जाएगा।
उन्होंने सड़कों, पुलों एवं पुलियों की मरम्मत, कटान रोकने के उपाय, बालू की बोरियों की उपलब्धता तथा बाढ़ शरणालयों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही वैकल्पिक मार्ग, पेयजल, दवाइयां, पशुचारा एवं विद्युत आपूर्ति जैसी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखने को कहा।
बैठक में जनपद की प्रमुख नदियों — यमुना नदी, बेतवा नदी, नून नदी, पहूज नदी एवं सिंध नदी — के जलस्तर की समीक्षा की गई। बताया गया कि यमुना नदी का खतरा स्तर कालपी में 108 मीटर तथा बेतवा नदी का खतरा स्तर मोहाना में 122.664 मीटर निर्धारित है।
सिंचाई विभाग के अनुसार, विगत वर्षों में वर्ष 2022 में सर्वाधिक औसत वर्षा 856 मिमी दर्ज की गई थी। जनपद की पांचों तहसीलों—जालौन, उरई, कालपी, कोंच एवं माधौगढ़—के कुल 1155 गांवों में से 158 गांवों को बाढ़ प्रभावित संभावित श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जहां 27 बाढ़ चौकियां स्थापित की जाएंगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नदियों के जलस्तर की जानकारी प्रतिदिन संबंधित विभागों से प्राप्त कर प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए और खतरे के स्तर के करीब पहुंचते ही तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएं।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल विभागीय कार्य नहीं बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील दायित्व है, इसलिए सभी विभाग पूरी तैयारी और समन्वय के साथ कार्य करें।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीरेंद्र सिंह, समस्त उपजिलाधिकारी, अधिशाषी अभियंता सिंचाई धर्म घोष, महेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।