उरई/जालौन।
उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत, उत्कृष्ट इतिहास और प्रगतिशील सोच के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। कला, साहित्य, संगीत और धर्म की महान विभूतियों की जन्मस्थली रहे प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने, उसका प्रचार-प्रसार करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
सरकार की “अपनी धरोहर, अपनी पहचान” योजना के अंतर्गत एडॉप्ट-ए-हेरिटेज नीति लागू की गई है। इसके तहत अब तक चार स्मारकों पर पांच वर्षों के लिए एमओयू कर स्मारक मित्र नियुक्त किए जा चुके हैं। साथ ही प्रदेश की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और अनुरक्षण का कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है।
प्रदेश के लोक कलाकारों को मंच देने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले जहां प्रदेश में केवल 415 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते थे, वहीं अब प्रतिवर्ष हजारों कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पहले लगभग 300 कलाकार ही भाग लेते थे, लेकिन अब “उत्तर प्रदेश संस्कृति उत्सव” के माध्यम से गांव-गांव से कलाकारों को जोड़कर उनका पंजीकरण कराया गया है। संस्कृति विभाग की आर्टिस्ट डायरेक्टरी में अब तक 9,532 कलाकार दल और लगभग 24,750 कलाकार पंजीकृत हो चुके हैं।
प्रदेश में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के कारण पर्यटन को भी नई गति मिली है। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिससे प्रदेश को घरेलू पर्यटक आगमन में देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ।
राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल का निर्माण कर तीन राष्ट्रनायकों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिनका उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2025 में किया।
सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रति यात्री एक लाख रुपये अनुदान की व्यवस्था की है। वहीं सिंधु दर्शन यात्रा के लिए 20 हजार रुपये प्रति यात्री सहायता दी जा रही है। गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण भी कराया गया है।
प्रदेश में बुजुर्ग संतों, पुरोहितों और पुजारियों के लिए विशेष बोर्ड गठन की प्रक्रिया जारी है। साथ ही कई प्रमुख तीर्थ विकास परिषदों का गठन किया गया है, जिनमें अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट धाम और ब्रज शामिल हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों और परियोजनाओं को नई पहचान दी गई है।
अक्टूबर 2025 में आयोजित अयोध्या दीपोत्सव में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। वहीं नवंबर 2025 में आयोजित देव दीपावली में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी पहुंचे।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में एक लाख अतिरिक्त कमरे जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 50 हजार नए होम-स्टे कमरों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। महिला भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए महिला पर्यटक गाइडों का 10 हजार रुपये का लाइसेंस शुल्क भी माफ किया गया है। “बेड एंड ब्रेकफास्ट” योजना के माध्यम से पर्यटकों को भारतीय परिवारों के साथ रहने और भारतीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।