जनसुनवाई में संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण: 80 वर्षीय बुजुर्ग को दो घंटे में मिली राहत, खतौनी अपडेट जिलाधिकारी की तत्परता से भूमि विवाद सुलझा, फरियादी के चेहरे पर लौटी मुस्कान

संवाददाता | उरई/जालौन

जनपद में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का एक प्रेरक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने जनसुनवाई के दौरान एक 80 वर्षीय बुजुर्ग फरियादी की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान सुनिश्चित कराया।

सुबह से ही अपने कार्यालय में जनसुनवाई कर रहे जिलाधिकारी ने दूर-दराज से आए फरियादियों की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए।

इसी दौरान तहसील कालपी के ग्राम आलमपुर निवासी लगभग 80 वर्षीय रामदयाल ने अपनी भूमि से संबंधित समस्या जिलाधिकारी के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि मौजा सुल्तानपुर उवारी, परगना कालपी स्थित उनकी आराजी में अंश निर्धारण के दौरान उनका हिस्सा शून्य (0.000 हे.) दर्ज हो गया था, जिससे वे व्यवहारिक रूप से भूमिहीन हो गए थे।

इस गंभीर मामले को जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान में लेते हुए उप जिलाधिकारी कालपी को मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में राजस्व टीम ने रिकॉर्ड का परीक्षण कर त्रुटि को सुधारा और मात्र दो घंटे के भीतर खतौनी को अपडेट कर दिया।

संशोधित खतौनी मिलने पर बुजुर्ग फरियादी के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के प्रभावी समाधान का मंच है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों के निस्तारण में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप आमजन को समय पर न्याय मिल सके।

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