गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी : जिलाधिकारी गौशालाओं में क्षमता के अनुरूप संरक्षण, हरे चारे, जल निकासी और सीसीटीवी निगरानी के दिए निर्देश

संवाददाता, उरई/जालौन

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जनपदीय गौ-संरक्षण अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद की विभिन्न गौशालाओं एवं वृहद गौ-संरक्षण केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गौआश्रय स्थलों में 100 से कम गोवंश संरक्षित हैं, उन्हें निकटवर्ती बड़े गौआश्रय स्थलों में समायोजित करने की कार्यवाही की जाए, जिससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और गोवंशों की देखभाल अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सके।

वृहद गौ-संरक्षण केंद्रों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि सभी केंद्र अपनी पूर्ण क्षमता के अनुरूप संचालित किए जाएं तथा किसी भी स्थिति में निराश्रित गोवंश खुले में विचरण करते हुए दिखाई न दें। उन्होंने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए गौशालाओं में जलभराव, कीचड़ एवं अन्य मौसमजनित समस्याओं से बचाव के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि गोवंशों के लिए सुरक्षित आश्रय, स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त पेयजल एवं प्रभावी जल निकासी व्यवस्था अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सभी गौआश्रय स्थलों पर वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसानों से अनुबंध कर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में गोचर भूमि पर हरे चारे के उत्पादन की समीक्षा भी की गई। जिलाधिकारी ने उपलब्ध धनराशि का प्रभावी उपयोग करते हुए उत्पादन बढ़ाने और चारे की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने गौशालाओं में अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव, भूसा, हरा चारा, पशु आहार एवं अन्य आवश्यक संसाधनों का नियमित रिकॉर्ड रखने तथा निरीक्षण के दौरान सभी अभिलेख अद्यतन रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने नोडल अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करने, गौशालाओं में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग सक्रिय रखने तथा विकासखंड स्तर पर कैटल कैचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सड़कों एवं मुख्य मार्गों पर विचरण कर रहे निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित गौआश्रय स्थलों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा।

बैठक में विकासखंड रामपुरा में प्रस्तावित वृहद गौ-संरक्षण केंद्र के निर्माण हेतु भूमि चिन्हांकन एवं अधिग्रहण की कार्यवाही की भी समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त गोसेवकों एवं केयरटेकरों के मानदेय का समयबद्ध भुगतान, पहचान पत्र वितरण तथा क्षमता संवर्धन के लिए विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा की गई।

जिलाधिकारी ने मृत गोवंशों के सम्मानजनक एवं समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा स्वयं सहायता समूहों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित गौशालाओं की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, डीसी मनरेगा रामेन्द्र सिंह, डीडीओ निशांत पाण्डेय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज अवस्थी, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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