संवाददाता, उरई/जालौन
आज दिनांक 29.05.2026 को आयुष्मान आरोग्य मंदिर कैलई, मलासा में फाइलेरिया, पोषण, टीबी तथा अन्य संचारी रोगों (डेंगू, मलेरिया आदि) एवं रिवाइज्ड गाइडलाइन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पीएसपी-डीजीसी सदस्यों के रूप में आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, प्रधान श्रीमती सुधा, कोटेदार पप्पू, CHO, संगिनी, 24 फाइलेरिया मरीज, स्वयंसेवक एवं समुदाय के लोग सहित कुल 36 प्रतिभागी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक प्रेम सिंह कटियार की उपस्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) संध्या के.के. द्वारा प्रतिभागियों को फाइलेरिया, टीबी एवं अन्य संचारी रोगों के लक्षण, बचाव एवं प्रबंधन के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का उपयोग, हवादार वातावरण, संतुलित आहार तथा समय पर जांच एवं उपचार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई।
टीबी (क्षय रोग) के संक्रमण, लक्षण एवं बचाव उपायों पर भी विशेष जानकारी दी गई। बताया गया कि यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है तथा लगातार खांसी, बुखार, वजन में कमी एवं कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके बचाव हेतु खांसते-छींकते समय मुंह ढकना, मास्क का उपयोग, भीड़ से बचाव तथा घर को हवादार रखना आवश्यक है। साथ ही कम से कम 6 माह तक पूरा उपचार करने पर जोर दिया गया, क्योंकि अधूरा इलाज दवा-प्रतिरोधी टीबी का कारण बन सकता है।
कार्यक्रम में फाइलेरिया मरीजों के लिए MMDP (मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन) के अंतर्गत सेल्फ केयर, व्यायाम एवं पैर की स्वच्छता का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। CHO द्वारा फ्लिपबुक एवं IEC सामग्री के माध्यम से डेमो प्रस्तुत किया गया।
जिला समन्वयक द्वारा फाइलेरिया के गंभीर मरीजों के UDID कार्ड निर्माण हेतु पात्र लाभार्थियों की पहचान कर ऑनलाइन पंजीकरण एवं सीएमओ कार्यालय में लगने वाले शिविरों में आवेदन करने की जानकारी दी गई। साथ ही पीएसपी सदस्यों को इसमें सहयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान 22 फाइलेरिया मरीजों को MMDP किट वितरित की गई तथा नियमित फॉलो-अप भी किया गया। साथ ही समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों, स्कूल रैली, घर-घर संपर्क अभियान एवं मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु विशेष अभियान चलाने पर चर्चा की गई।
प्रधान श्रीमती सुधा द्वारा स्वच्छता, मच्छरदानी के उपयोग एवं सरकारी योजनाओं के लाभ के संबंध में जानकारी साझा की गई। वहीं CHO द्वारा जलभराव रोकने, साफ-सफाई, फुल आस्तीन के कपड़े पहनने तथा मच्छरदानी के नियमित उपयोग की अपील की गई।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को वीडियो, लैपटॉप एवं फ्लिपबुक के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया, जिससे समुदाय स्तर पर जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।