24 अधिकारियों का अगस्त माह का वेतन अग्रिम आदेश तक रोका, 4 उपजिलाधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
संवाददाता
उरई/जालौन
जनपद जालौन, 06 अगस्त 2026। जनशिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस पोर्टल, जनसुनवाई पोर्टल एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान लापरवाही पाए जाने पर जिलाधिकारी ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की।
जिलाधिकारी ने शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता न बरतने वाले 24 अधिकारियों के अगस्त 2026 माह के वेतन आहरण पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए। वहीं 4 उपजिलाधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस प्रकार कुल 28 अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
समीक्षा बैठक के दौरान जुलाई 2026 में प्राप्त शिकायतों का विभागवार परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि कई अधिकारियों द्वारा शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई तथा शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक ढंग से नहीं किया गया।
इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जनशिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने संबंधित 4 उपजिलाधिकारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए। वहीं विभिन्न विभागों के 24 अधिकारियों के अगस्त माह के वेतन आहरण पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाने की कार्रवाई की गई।
प्रत्येक शिकायत की व्यक्तिगत निगरानी के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि आईजीआरएस, जनसुनवाई पोर्टल एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का व्यक्तिगत स्तर पर अनुश्रवण किया जाए। शिकायतकर्ता को केवल औपचारिक जवाब देने के बजाय वास्तविक, गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक समाधान उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। शिकायतकर्ता को उसके प्रकरण में की गई कार्रवाई की जानकारी भी समय से उपलब्ध कराई जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि की गई कार्रवाई का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ जनशिकायत निस्तारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनोन्मुखी प्रशासन उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि भविष्य में शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।