JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, छात्रों के आंदोलन का असर

झारखंड में छात्रों के विरोध के बाद पीटी परीक्षा रद्द, कई मांगों पर सरकार की सहमति; फिर भी नहीं खत्म हुआ अनशन

एजेंसी
रांची।

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार असर दिखा रहा है। छात्रों के लंबे समय से जारी विरोध और आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे को भी राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। हालांकि, सरकार की ओर से छात्रों की कई प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बावजूद आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और छात्रों का अनशन जारी है।

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार की सिफारिश को स्वीकार करते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों के त्यागपत्र को मंजूरी प्रदान कर दी है। लोक भवन, झारखंड की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पद से इस्तीफा देने वाले सदस्यों में अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद शामिल हैं।

राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद राज्यपाल ने संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत तीनों सदस्यों के इस्तीफे को स्वीकृति प्रदान की। सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब झारखंड में छात्र संगठन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द

छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को रद्द करने का निर्णय लिया है। परीक्षा को लेकर छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। आंदोलन कर रहे छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच की मांग की थी।

सरकार ने छात्रों की मांगों पर विचार करते हुए प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद आंदोलनरत छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इसके बावजूद कई छात्र संगठनों ने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है।

कई मांगों पर सरकार ने जताई सहमति

झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच सहित कई मांगें सरकार के सामने रखी थीं।

रविवार को तीसरे दौर की वार्ता के दौरान सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी। सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि छात्र आंदोलन समाप्त कर देंगे, लेकिन कुछ मांगों को लेकर अभी भी असंतोष बना हुआ है।

अनशन खत्म नहीं होने से आंदोलन जारी

सरकार के साथ वार्ता में कई मांगों पर सहमति बनने और जेपीएससी की 14वीं पीटी परीक्षा रद्द किए जाने के बावजूद आंदोलनरत छात्रों ने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्र संगठनों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में वे परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

छात्र संगठनों का कल विधानसभा घेराव

आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों ने विधानसभा घेराव का भी ऐलान किया है। छात्र संगठनों के अनुसार, यह घेराव तय समय के मुताबिक किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने सरकार से अपनी सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है।

छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

सरकार के फैसले के बाद बढ़ी उम्मीद, लेकिन छात्रों का रुख सख्त

14वीं जेपीएससी पीटी रद्द करने और आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे को मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने आंदोलन को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके बावजूद छात्रों का रुख अभी भी सख्त नजर आ रहा है। छात्र संगठन अपनी बाकी मांगों को लेकर सरकार से लिखित और स्पष्ट आश्वासन की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना ही पर्याप्त नहीं है। पूरी परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, कथित अनियमितताओं की जांच कराने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए ठोस व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

छात्र आंदोलन का मुख्य मुद्दा झारखंड में आयोजित होने वाली प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि युवाओं को कई वर्षों तक मेहनत करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर मिलता है। यदि परीक्षा प्रक्रिया में पेपर लीक या अन्य अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो अभ्यर्थियों की मेहनत और समय दोनों प्रभावित होते हैं।

इसी को लेकर छात्र संगठनों ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों में वार्ता का दौर जारी

पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। रविवार को हुई तीसरे दौर की वार्ता में सरकार ने छात्रों की कई मांगों को स्वीकार किया। इसके बाद आंदोलन समाप्त होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन छात्रों ने अभी अपना अनशन खत्म नहीं किया है।

छात्रों का कहना है कि आंदोलन तभी समाप्त किया जाएगा, जब उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय सामने आएगा। वहीं, सरकार की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

जेपीएससी के तीन सदस्यों के इस्तीफे को मंजूरी महत्वपूर्ण कदम

जेपीएससी के तीन सदस्यों के इस्तीफे को राज्यपाल की मंजूरी को भी इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों में अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद शामिल हैं। राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इन इस्तीफों को स्वीकृति दी गई।

छात्र आंदोलन के बीच आयोग के सदस्यों के इस्तीफे और 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द किए जाने के बाद झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

अब आगे की परीक्षा प्रक्रिया पर रहेगी नजर

14वीं जेपीएससी पीटी रद्द किए जाने के बाद अब आगे की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नजर सरकार और आयोग के अगले कदम पर है। छात्रों की मांग है कि नई परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

वहीं, आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। विधानसभा घेराव के ऐलान और अनशन जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

फिलहाल सरकार की ओर से छात्रों की कई मांगें माने जाने, 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द किए जाने और आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे को मंजूरी दिए जाने के बाद भी छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब सबकी नजर सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली अगली वार्ता तथा आंदोलन के अगले चरण पर है।

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