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ढाका। बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले चुनाव के लिए नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि से ठीक एक दिन पहले, छात्रों की अगुवाई वाली नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) में भारी अंतर्विरोध उजागर सामने आया है। जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे के विषय में संगठन के दो प्रमुख नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। बिखरे स्वयं अग्रणी नेताओं के संगठन से बाहर हो जाने होने की चर्चा है। दोनों नेताओं ने जमात के संस्थापक महमूद हसन के पत्र लिख कर अपने फैसले की घोषणा की। साथ गठबंधन को विधानसभा और विधानपरिषद की कमजोर करने वाला करार दिया है।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली स्टार के मुताबिक छात्र आंदोलन से उभरे छात्रों की अगुवाई वाली पार्टियों के बीच घनिष्ठ संबंध सामने आने के बाद जमात-ए-इस्लामी की
अग्रणी छात्र संगठन इस्लामिक छत्र लीग (आईसीएल) ने नेहरूगढ़ के छात्रों-ए-इस्लामी में गठबंधन की पेशकश की। आज नई अन्य अग्रणी नेता इस्लामिया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
हालाँकि, जुलाई विद्रोह के अगुवा लगाया गया है कि जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र संगठन, इस्लामी छात्र शिविर ने विपक्षकांती राजनीति, घूसखोरी, राजनीति के खिलाफ खड़े छात्र, छात्र संघ चुनाव के दौरान छात्र और महिला सदस्यों पर आंदोलन जारी रहने के लिए यह है।
पत्र में जमात को 1971 में स्वतंत्रता-विरोधी मुक्ति, सैन्य में अस्थि मिलिशिया और युद्धकालीन अपराधों पर उनके रुख को याद दिलाते हुए कहा गया कि वे बांग्लादेश की लोकतांत्रिक चेतना और पार्टी के मूल्यों के साथ मेल नहीं खाते।
अग्रणी छात्रों की अगुवाई करने वाले संगठन में गहरा अंतर्विरोध उजागर हो गया है। इससे आगामी पार्टी की नीति निर्धारण, चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालाँकि, जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन का समर्थन करने वाले छात्र नेताओं का कहना है कि यह चुनावी मजबूरी है।