जिला कारागार उरई में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन

संवाददाता | उरई/जालौन

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन की सचिव श्रीमती शाम्भवी द्वारा जिला कारागार उरई में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने साप्ताहिक निरीक्षण भी किया।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने विभिन्न बैरकों का भ्रमण कर निरुद्ध बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इस अवसर पर जेल प्रशासन के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

श्रीमती शाम्भवी ने बंदियों के मुकदमों की पैरवी, उन्हें प्रदान की जा रही विधिक सहायता एवं परामर्श, महिला बंदियों तथा उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा एवं खान-पान व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं या जिनकी पैरवी सही ढंग से नहीं हो पा रही है, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन विचाराधीन बंदियों को सरकारी खर्च पर अधिवक्ता की आवश्यकता है, उनके लिए संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कराया जाए। साथ ही, जिन बंदियों की जमानत हो चुकी है लेकिन जमानतदार के अभाव में वे अभी भी जेल में हैं, वे भी लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सहायता ले सकते हैं।

दोषसिद्ध बंदियों के संबंध में उन्होंने निर्देश दिए कि यदि उनकी अपील लंबित है या नहीं की गई है, तो नियमानुसार जेल अपील कराई जाए। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से समन्वय स्थापित कर समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि अपील की अवधि समाप्त न हो।

विधिक साक्षरता शिविर का शुभारंभ वृक्षारोपण के साथ किया गया। इस अवसर पर श्रीमती शाम्भवी ने स्थायी लोक अदालत, लीगल एड डिफेंस सिस्टम तथा वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के बारे में भी जानकारी दी।

असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री अभिषेक पाठक ने बंदियों को प्ली-बार्गेनिंग योजना, समयपूर्व रिहाई और बंदियों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे विचाराधीन बंदी, जिन पर अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा वाले मामले चल रहे हैं और जो कुछ अवधि जेल में बिता चुके हैं, वे पीड़ित पक्ष से समझौता कर मुआवजा देकर अपनी सजा कम करा सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा देश के विरुद्ध, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध या आर्थिक अपराधों में लिप्त आरोपियों को नहीं मिलेगी।

इस अवसर पर जेल अधीक्षक श्री नीरज देव, कारापाल श्री प्रदीप कुमार, उप कारापाल श्री अमर सिंह तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री दीपक नारायण उपस्थित रहे।

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