कृषकों को एपेडा पंजीकरण व गुणवत्ता मानकों की दी गई जानकारी
संवाददाता — कानपुर देहात
जनपद कानपुर देहात में कृषि एवं प्रसस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकास भवन, माती स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन कृषि एवं प्रसस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) के सहयोग से किया गया, जिसमें कृषक, निर्यातक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. बल्देव प्रसाद ने बताया कि एपेडा कृषि फसलों जैसे अनाज, दलहन, तिलहन तथा बागवानी फसलों—फल, सब्जियाँ, पुष्प, औषधीय एवं सगंध फसलें, शहद एवं कृषि आधारित प्रसस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात हेतु एक सहयोगी संस्था के रूप में कार्य कर रही है।
एपेडा के प्रतिनिधि आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि निर्यात के इच्छुक कृषक एवं कृषक उत्पादक समूह हार्टीनेट पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। निर्यात पंजीकरण हेतु एक्सपोर्ट पोर्टल (IEC) पर ₹500 शुल्क निर्धारित है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2024–25 में एपेडा के माध्यम से ₹2,43,000 करोड़ का निर्यात किया गया, जिसमें अनाज फसलों की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तथा प्रसस्कृत खाद्य पदार्थों की 10 प्रतिशत रही।
कार्यशाला के दौरान निर्यातकों सुनील कुमार गुप्ता, अर्पित अग्रवाल एवं महेन्द्र कटियार ने मंडी से जुड़ी समस्याओं को रखा। भिंडी उत्पादक किसान सुन्दर लाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2004 में एपेडा में पंजीकरण कराया था, किंतु निर्यात नहीं हो सका। इस पर एपेडा प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि फल एवं सब्जियों का निर्यात केवल गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही संभव है तथा प्रसस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए एफएसएसएआई पंजीकरण एवं गुणवत्ता मानक अनिवार्य हैं।
किसान बाबू सिंह कटियार ने किसानों को पंजीकरण एवं निर्यात प्रक्रिया में सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक हरि शंकर भार्गव, जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश गुप्ता, कृषि विज्ञान केंद्र दलीपनगर से शशिकांत, वरिष्ठ मंडी निरीक्षक प्रताप सिंह सहित अनेक निर्यातक एवं दर्जनों कृषक उपस्थित रहे।
कार्यशाला के अंत में जिला उद्यान अधिकारी ने जनपद की कृषि संभावनाओं की जानकारी देते हुए कृषकों से विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराने एवं व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने की अपील की, ताकि भविष्य में आयोजित होने वाले निर्यात मेलों एवं कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।