गुरु तेग बहादुर साहिब जैसा बलिदान इतिहास में कहीं नहीं: दत्तात्रेय होसबाले

RSS के सरकार्यवाह ने गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि दी

संवाददाता/डीटीएनएन (कानपुर)

कानपुर में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के शहीदी दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

होसबाले का संबोधन और श्रद्धांजलि

  • बलिदान की महत्ता: दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी जैसा बलिदान इतिहास में कहीं नहीं मिलता।

  • गुरु तेग बहादुर का परिचय: उन्होंने कहा कि साहस, शौर्य और बलिदान के प्रतीक गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे।

  • इतिहास: उन्होंने याद दिलाया कि मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचार से पीड़ित कश्मीरी पंडितों ने गुरु की शरण ली थी। गुरु ने उन्हें धर्म की रक्षा का वचन दिया और औरंगजेब की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया।

  • यातना और धर्म की रक्षा: औरंगजेब के आदेश पर उनको यातनाएं दी गईं और धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया, लेकिन वह अपने मार्ग से डिगे नहीं। वर्ष 1675 में उन्होंने धर्म, मानवता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपना प्राणों का बलिदान दिया।

सम्मान और उपस्थिति

  • सम्मान: इस अवसर पर श्री गुरु सिंह सभा कानपुर महानगर के पदाधिकारियों ने सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को सरोपा देकर सम्मानित किया।

  • उपस्थिति: सोमवार को केशव भवन में गुरुद्वारा बाबा नामदेव समिति, सिख पंजाबी वेलफेयर सोसाइटी और बाबा सुंदर सिंह ट्रस्ट की ओर से भी दत्तात्रेय होसबाले का स्वागत किया गया।

  • तलवार भेंट: उन्हें गुरु तेग बहादुर जी की स्मृति चिन्ह के तौर पर तलवार भेंट की गई।

  • अन्य गणमान्य: कार्यक्रम में श्री गुरु सिंह सभा के चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह, प्रधान सिमरनजीत सिंह, गुरविंदर सिंह छबड़ा (विक्की) समेत सरदार नीतू सिंह, अमरजीत सिंह पम्मी, पिंकी बग्गा, राजेंद्र सिंह काके और हरपाल आदि मौजूद रहे।

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