हर थाने में प्रशिक्षित किए गए फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पॉन्डर, अपराध विवेचना होगी अधिक वैज्ञानिक और निष्पक्ष
संवाददाता
उरई/जालौन
उरई। अपराध की घटनाओं की विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में जालौन पुलिस ने पहल की है। पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन एवं पुलिस महानिरीक्षक झांसी परिक्षेत्र के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक जालौन के पर्यवेक्षण में जिले के प्रत्येक थाने में मिनी फील्ड यूनिट-फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पॉन्डर तैयार किए गए हैं।
इसी क्रम में पुलिस लाइन उरई स्थित सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रत्येक थाने से दो पुलिसकर्मियों को घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने, उन्हें सुरक्षित रखने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संरक्षित करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य घटनास्थल से मिलने वाले महत्वपूर्ण साक्ष्यों को वैज्ञानिक एवं मानक प्रक्रिया के तहत एकत्र कर विवेचना को मजबूत करना है।
पोस्टमार्टम से जुड़ी बारीकियों की दी जानकारी
कार्यशाला के दौरान पुलिसकर्मियों को पोस्टमार्टम और मृत्यु के बाद शरीर में होने वाले विभिन्न परिवर्तनों से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में एल्गोर मॉर्टिस यानी मृत्यु के बाद शरीर के तापमान में होने वाले बदलाव, रिगर मॉर्टिस यानी मृत्यु के बाद शरीर में अकड़न तथा लिवर मॉर्टिस यानी शरीर के निचले हिस्सों में नीले-बैंगनी रंग के निशान पड़ने की स्थिति के बारे में विस्तार से समझाया गया।
इसके अलावा कैडेवरिक स्पैज्म यानी मृत्यु के समय अचानक मांसपेशियों के अकड़ने की स्थिति के संबंध में भी पुलिसकर्मियों को जानकारी दी गई, ताकि घटनास्थल और शव से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को बेहतर ढंग से समझकर विवेचना में शामिल किया जा सके।
फिंगर प्रिंट और ब्लड सैंपल जुटाने का कराया अभ्यास
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को घटनास्थल को सुरक्षित रखने, महत्वपूर्ण स्थानों को चिन्हित करने तथा साक्ष्यों को दूषित होने से बचाने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके साथ ही फिंगर प्रिंट, ब्लड सहित अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्र करने और सुरक्षित रखने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत होगी विवेचना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आधुनिक अपराध विवेचना में वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है। घटनास्थल पर प्रशिक्षित फॉरेंसिक फर्स्ट रिस्पॉन्डर की मौजूदगी से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समय रहते सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
पुलिस का मानना है कि इस पहल से अपराध की घटनाओं की निष्पक्ष, त्वरित और वैज्ञानिक विवेचना को मजबूती मिलेगी। साथ ही वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने और मामलों के प्रभावी