पंचनद धाम में पांच पवित्र नदियों की प्रतिमाओं का लोकार्पण, जल संरक्षण का लिया महा-संकल्प : स्वतंत्र देव सिंह

संवाददाता | उरई/जालौन

जनपद जालौन के ऐतिहासिक एवं पावन पंचनद धाम में उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी एवं पहुज नदियों की भव्य प्रतिमाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने पंचनद की पुण्यभूमि को नमन करते हुए कहा कि यह केवल प्रतिमाओं का अनावरण नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जल संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प का ऐतिहासिक अवसर है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रयागराज की त्रिवेणी भारत की आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है, उसी प्रकार पंचनद पांच पवित्र नदियों का अद्भुत संगम है, जो देश की सांस्कृतिक एकता और प्राकृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिमाओं की स्थापना लोगों को जल, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का निरंतर स्मरण कराएगी।

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जलधारा नहीं, बल्कि ‘मां’ का स्वरूप माना गया है। उन्होंने ऋग्वेद एवं अथर्ववेद का उल्लेख करते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है और पृथ्वी की गोद में बहने वाली नदियां मानव सभ्यता की जीवनदायिनी हैं। उन्होंने कहा कि पंचनद का संगम विविधता में एकता का ऐसा संदेश देता है, जो भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जल संकट की चुनौती का सामना कर रही है, लेकिन भारत अपनी प्राचीन जल संरक्षण परंपराओं को पुनर्जीवित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘कैच द रेन’, जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रम जनआंदोलन का रूप ले चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य ‘हर घर जल और हर खेत को पानी’ सुनिश्चित करना है।

मंत्री ने कहा कि एक समय बुंदेलखंड की पहचान सूखा और पेयजल संकट थी, लेकिन आज स्थिति तेजी से बदली है। लगभग 99.79 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंच चुका है और बुंदेलखंड पूर्ण ‘हर घर जल’ की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि सतही जल आधारित पाइपलाइन नेटवर्क एवं आधुनिक जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे जलजनित रोगों में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से बुंदेलखंड के कई ब्लॉक, जो पहले डार्क जोन घोषित थे, अब सुरक्षित श्रेणी में लौट रहे हैं। मानसून के बाद भूजल स्तर में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। प्रदेश में 15 हजार से अधिक अमृत सरोवर, 5800 से अधिक चेकडैम तथा सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के माध्यम से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई से जोड़ा गया है, जिससे जल की उल्लेखनीय बचत हो रही है।

जलशक्ति मंत्री ने कहा कि पंचनद क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां चंबल और सिंध नदियों का स्वच्छ जल गंगा डॉल्फिन एवं घड़ियाल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आवास है। उन्होंने लोगों से नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने, जल की प्रत्येक बूंद को अमूल्य मानने तथा वृक्षारोपण और जल संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की 64 छोटी-बड़ी नदियों का पुनर्जीवन किया जा चुका है तथा वर्षों से विलुप्त 110 नहरों को पुनर्जीवित किया गया है। ‘एक जनपद-एक नदी’ अभियान के तहत आधुनिक तकनीकों की सहायता से विभिन्न नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 6627 से अधिक चेकडैम, 1417 से अधिक तालाब तथा 34 हजार से अधिक सरकारी भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा बाढ़ सुरक्षा एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी सफल होगा जब राजशक्ति के साथ जनशक्ति भी जुड़ेगी। सभी नागरिकों को जल संरक्षण, नदी संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाकर आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए कार्य करना होगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, जलशक्ति मंत्री के प्रतिनिधि अरविंद चौहान, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह, परमार्थ संस्था के संजय कुमार एवं वरुण, संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, जल सहेलियां तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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