बुंदेलखंड में बागवानी से बदली तस्वीर, किसानों की आय में कई गुना वृद्धि संयुक्त सचिव ने किया निरीक्षण, मॉडल फार्म को बताया ‘प्रेरणा केंद्र’

उरई/जालौन।
प्रधानमंत्री धन्य धान योजना के अंतर्गत जनपद जालौन के विकास खंड डकोर में बागवानी आधारित खेती किसानों की आय बढ़ाने का सफल मॉडल बनकर उभर रही है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं योजना के नोडल अधिकारी मानश्वी कुमार ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय के साथ ग्राम धमनी बुजुर्ग और कुसमिलिया में कृषकों के उद्यानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

ग्राम धमनी बुजुर्ग में कृषक राज राजपूत, शैलेन्द्र राजपूत एवं माताप्रसाद द्वारा लगभग तीन हेक्टेयर क्षेत्र में आम के उद्यान के साथ ताइवान पिंक अमरूद की सहफसल का अभिनव प्रयोग किया गया है। उद्यान में लगभग 2000 अमरूद के पौधों के साथ प्रारंभिक वर्षों में सब्जी मटर (एपी-3) की खेती कर प्रति हेक्टेयर करीब 20 कुंतल बीज उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है, जिससे लगभग डेढ़ लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित हो रही है।

जल प्रबंधन के लिए 90 प्रतिशत अनुदान पर टपक सिंचाई एवं मिनी स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग हो रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार, तीन वर्षों के उपरांत आम के उद्यान से प्रति हेक्टेयर लगभग 60 कुंतल उत्पादन से करीब 2.40 लाख रुपये आय की संभावना है, जबकि सात से आठ वर्षों में यह आय बढ़कर लगभग 6 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।

इसी क्रम में ग्राम कुसमिलिया में कृषक गीतेश राजपूत के थाई एप्पल बेर एवं आम के मिश्रित उद्यान का भी निरीक्षण किया गया। इस उद्यान से आय में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है—प्रथम वर्ष लगभग 50 हजार रुपये, द्वितीय वर्ष डेढ़ लाख रुपये, तृतीय वर्ष साढ़े तीन लाख रुपये तथा चतुर्थ वर्ष लगभग पांच लाख रुपये तक आय प्राप्त हुई। सहफसल के रूप में मटर की खेती से भी लगभग एक लाख रुपये अतिरिक्त आय सुनिश्चित हो रही है।

हालांकि वर्ष 2025-26 में असामान्य वर्षा के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, फिर भी किसानों ने आय का संतुलन बनाए रखा।

संयुक्त सचिव एवं नोडल अधिकारी मानश्वी कुमार ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे सफल उद्यानों को “प्रेरणा केंद्र” के रूप में विकसित किया जाए तथा विद्यालयों के विद्यार्थियों का भ्रमण कराया जाए, ताकि नई पीढ़ी को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा जा सके।

उन्होंने कहा कि बागवानी, सहफसल एवं आधुनिक सिंचाई तकनीकों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन रहा है, जिसे जनपद में व्यापक स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक एसके उत्तम, उद्यान अधिकारी परवेज खान सहित अन्य अधिकारी एवं कृषक उपस्थित रहे।

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