दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 का अधिकाधिक लाभ उठाकर जालौन को डेयरी उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने का आह्वान : जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय
संवाददाता | उरई/जालौन
उत्तर प्रदेश सरकार की दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा डेयरी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकास भवन सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने की। कॉन्क्लेव में डेयरी उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों (एमपीसी), दुग्ध उत्पादकों, सहकारी संस्थाओं, निजी निवेशकों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता कर डेयरी क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं एवं शासन की नीतियों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है और राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में प्रदेश का लगभग 16 प्रतिशत योगदान है। इसके बावजूद राज्य में विपणन योग्य अधिशेष दूध का केवल लगभग 10 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत हो रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत इससे अधिक है। ऐसे में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों के निर्माण तथा आधुनिक डेयरी उद्योगों की स्थापना की दिशा में तेज़ी से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, संतुलित पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता, लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति तथा आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता के कारण डेयरी उद्योग में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। यदि किसान, स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, सहकारी संस्थाएं एवं निजी निवेशक इस क्षेत्र में आगे आते हैं तो न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
जिलाधिकारी ने बताया कि दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में डेयरी आधारित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना, दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का उचित एवं लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना तथा वर्तमान दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को लगभग 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक पहुंचाना है। साथ ही विपणन योग्य अधिशेष दूध की प्रसंस्करण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करना भी इस नीति का प्रमुख लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि इस नीति के अंतर्गत ग्रीनफील्ड एवं ब्राउनफील्ड डेयरी परियोजनाओं, पशु आहार निर्माण इकाइयों, मिल्क चिलिंग सेंटर, बल्क मिल्क कूलर, कोल्ड चेन अवसंरचना, रेफ्रिजरेटेड वाहनों, रोड मिल्क टैंकर, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों तथा आधुनिक डेयरी तकनीकों की स्थापना के लिए विभिन्न प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहन एवं पूंजीगत अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि पात्र उद्यमियों को प्लांट एवं मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्य एवं आवश्यक उपकरणों पर 35 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान निर्धारित सीमा तक दिया जाएगा। वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा स्थापित मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पाद इकाइयों को 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान प्रदान किए जाने का भी प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत डेयरी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्टाम्प शुल्क में छूट, विद्युत शुल्क की प्रतिपूर्ति, सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना पर अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन, परीक्षण शुल्क, पेटेंट एवं डिज़ाइन पंजीकरण पर सहायता तथा निर्यात प्रोत्साहन जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे प्रदेश के डेयरी उद्योग को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
जिलाधिकारी ने किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों से वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने, उन्नत नस्लों के पशुओं का पालन करने, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन एवं आधुनिक डेयरी प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, एफपीओ, मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों, स्वयं सहायता समूहों तथा डेयरी उद्यमियों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध करा रही है, जिससे डेयरी व्यवसाय को लाभकारी बनाया जा सके।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक किसानों, डेयरी उद्यमियों, एफपीओ, सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों को इस नीति का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि जालौन में डेयरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश होता है तो किसानों को दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों का उत्पादन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
कॉन्क्लेव के दौरान उपस्थित निवेशकों एवं उद्यमियों को नीति के विभिन्न प्रावधानों, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग तथा शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें डेयरी क्षेत्र में निवेश के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम, संबंधित विभागों के अधिकारी, डेयरी उद्यमी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों के प्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।