कक्षा में पहुंचकर बच्चों से पूछे सवाल, कविता भी सुनी; बच्चों के साथ कविता गाकर बढ़ाया उत्साह
संवाददाता | उरई/जालौन
उरई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने उरई नगर स्थित परिषदीय प्राथमिक विद्यालय बघौरा का औचक निरीक्षण कर विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति और पठन-पाठन की स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी के अचानक विद्यालय पहुंचने से विद्यालय में मौजूद शिक्षकों और कर्मचारियों में सक्रियता देखने को मिली। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केवल व्यवस्थाओं का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि सीधे कक्षा में पहुंचकर बच्चों से संवाद किया और उनकी पढ़ाई-लिखाई के स्तर को समझने का प्रयास किया।
उपस्थिति रजिस्टर का किया अवलोकन
विद्यालय पहुंचने के बाद जिलाधिकारी ने सबसे पहले उपस्थिति रजिस्टर का अवलोकन किया। रजिस्टर की जांच के दौरान पाया गया कि विद्यालय के प्रधानाचार्य अवकाश पर थे। इसके बाद जिलाधिकारी ने विद्यालय में उपस्थित शिक्षकों से विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की पढ़ाई, विद्यालय में संचालित शिक्षण गतिविधियों तथा पठन-पाठन की नियमितता के बारे में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रधानाचार्य अथवा किसी अन्य शिक्षक के अवकाश पर होने की स्थिति में भी विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य नियमित रूप से संचालित किया जाए और बच्चों की शिक्षा के प्रति किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
कक्षा में पहुंचकर बच्चों से किया सीधा संवाद
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय सीधे कक्षा में पहुंचे और छात्र-छात्राओं के बीच बैठकर उनसे बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, पसंदीदा विषयों तथा विद्यालय में आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में सवाल पूछे।
जिलाधिकारी के सहज अंदाज में किए गए सवालों का बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक जवाब दिया। इससे कक्षा का माहौल काफी जीवंत नजर आया। जिलाधिकारी ने बच्चों की शैक्षणिक समझ को परखने के लिए उनसे अलग-अलग विषयों से संबंधित सवाल भी किए और उनकी प्रतिक्रिया को ध्यानपूर्वक सुना।
बच्चों से सुनी कविता, फिर खुद भी गाने लगे
बच्चों से संवाद के दौरान जिलाधिकारी ने उनसे कविता सुनाने के लिए कहा। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ कविता प्रस्तुत की। बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर जिलाधिकारी स्वयं भी उनके साथ कविता गाने लगे।
जिलाधिकारी को अपने बीच सहजता से कविता गाते देखकर बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। इस दौरान जिलाधिकारी ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए उनके साथ सहज संवाद कायम किया। उनका यह अंदाज बच्चों के लिए उत्साहवर्धक रहा और कक्षा का वातावरण भी खुशनुमा हो गया।
जिलाधिकारी ने निभाई शिक्षक की भूमिका
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका तक सीमित न रहते हुए शिक्षक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने स्वयं बच्चों को पढ़ाया और विषय को सरल एवं सहज तरीके से समझाने का प्रयास किया।
उन्होंने बच्चों से प्रश्न पूछकर यह जानने का प्रयास किया कि वे पढ़ाए जा रहे विषय को किस स्तर तक समझ पा रहे हैं। बच्चों के उत्तर सुनने के बाद जिलाधिकारी ने उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाते हुए कहा कि नियमित अध्ययन और सीखने की आदत बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बच्चों को विद्यालय में होने वाली गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। विद्यालय केवल किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा और सीखने की क्षमता विकसित करने का माध्यम बने।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में ऐसा सकारात्मक और सहज वातावरण होना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी संकोच के अपनी बात कह सकें, शिक्षकों से सवाल पूछ सकें और नई चीजें सीखने के प्रति उनमें उत्सुकता बनी रहे।
जिलाधिकारी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की क्षमताओं को पहचानते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता अलग हो सकती है, इसलिए शिक्षकों को बच्चों के स्तर के अनुरूप सरल और प्रभावी तरीके से शिक्षण कार्य करने पर ध्यान देना चाहिए।
निरीक्षण में दिखा प्रशासन का जमीनी स्तर पर फोकस
जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासन द्वारा परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। विद्यालय में अधिकारियों के निरीक्षण का उद्देश्य केवल अभिलेखों की जांच तक सीमित न रहकर वास्तविक शैक्षणिक स्थिति को समझना भी है।
बच्चों से सीधे बातचीत कर उनकी पढ़ाई और समझ का आकलन करने से विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति के बारे में अधिक वास्तविक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने कक्षा में पहुंचकर बच्चों से संवाद किया और शिक्षण प्रक्रिया में स्वयं भी भागीदारी की।
मुख्य विकास अधिकारी रहे मौजूद
विद्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाओं और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया गया।
जिलाधिकारी ने विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित पठन-पाठन और बच्चों के अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।