ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत रूरा पुलिस को सफलता, मारपीट के तीन आरोपियों को न्यायालय ने किया दोषी करार

संवाददाता
कानपुर देहात | 04 अगस्त 2026

कानपुर देहात पुलिस द्वारा अपराधियों को शीघ्र एवं प्रभावी सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के अंतर्गत थाना रूरा पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। वर्ष 2022 के मारपीट के एक मामले में माननीय न्यायालय ने तीन महिला अभियुक्ताओं को दोषी ठहराते हुए न्यायालय उठने तक की सजा एवं अर्थदंड से दंडित किया है।

पुलिस के अनुसार यह मामला 30 सितंबर 2022 का है, जब थाना रूरा क्षेत्र के ग्राम बचीत भरतू निवासी लज्जावती पत्नी छोटेलाल, नीलम पत्नी अंकित एवं शिल्पी पुत्री छोटेलाल द्वारा वादी के साथ मारपीट की गई थी। घटना के संबंध में थाना रूरा पर एनसीआर संख्या 218/2022 के तहत धारा 323 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में अभियोग पंजीकृत किया गया था।

गुणवत्तापूर्ण विवेचना से मजबूत हुआ अभियोजन

घटना के बाद विवेचक द्वारा मामले की निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना की गई। वादी, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की पुष्टि की गई। विवेचना पूर्ण होने के बाद 03 दिसंबर 2022 को तीनों अभियुक्ताओं के विरुद्ध आरोप पत्र माननीय न्यायालय में प्रेषित किया गया।

इसके बाद थाना रूरा पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन अधिकारी एवं मॉनिटरिंग सेल ने लगातार प्रभावी पैरवी की। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा अभियुक्ताओं द्वारा जुर्म स्वीकार किए जाने के आधार पर मामला सिद्ध हुआ।

न्यायालय ने सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के उपरांत माननीय एसीजेएम-प्रथम (ACJM-I), कानपुर देहात की अदालत ने 04 अगस्त 2026 को अपना निर्णय सुनाते हुए तीनों अभियुक्ताओं लज्जावती, नीलम एवं शिल्पी को दोषसिद्ध घोषित किया।

न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्ता को न्यायालय उठने तक की सजा तथा ₹1,000-₹1,000 के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही आदेश दिया कि यदि कोई अभियुक्ता अर्थदंड जमा नहीं करती है, तो उसे दो-दो दिन के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।

अपराधियों को सजा दिलाने में ऑपरेशन कन्विक्शन की अहम भूमिका

कानपुर देहात पुलिस द्वारा संचालित ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर एवं लंबित आपराधिक मामलों में त्वरित विवेचना, प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के माध्यम से अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाना है। इस अभियान के तहत पुलिस, अभियोजन विभाग, कोर्ट पैरोकार एवं मॉनिटरिंग सेल के समन्वित प्रयासों से लगातार दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की दोषसिद्धियां न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहायक हैं, बल्कि समाज में कानून का सम्मान बढ़ाने, अपराधियों में भय उत्पन्न करने तथा कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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