संवाददाता – उरई/जालौन
जनपद जालौन में बुंदेलखंड की पारंपरिक जल संचयन पद्धति “हरवा” को आधुनिक तकनीक से जोड़कर वर्षा जल संरक्षण और भूजल वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
इस पहल के तहत खेतों में विशेष हरवा संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें लगभग 3 मीटर गहरे और 2 मीटर चौड़े गड्ढे बनाए जा रहे हैं। इन्हें पत्थर, बोल्डर और बालू से भरकर पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल स्तर बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 1000 हरवा संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिससे खेतों की नमी बनी रहेगी, सिंचाई पर निर्भरता घटेगी और किसानों की लागत में कमी आएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि जल ही जीवन है और पारंपरिक प्रणालियों को पुनर्जीवित कर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित कर सकते हैं। इस पहल से जालौन जल संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल जनपद के रूप में स्थापित होगा।