जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं, किसानों को शत-प्रतिशत लाभ दिलाएं : जिलाधिकारी

संवाददाता
उरई/जालौन

जनपद में संचालित भूमि संरक्षण एवं जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक के दौरान योजनाओं की धीमी प्रगति पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचाया जाए और कार्यों में तेजी लाकर निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि भूमि संरक्षण एवं जल संरक्षण की योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने, बंजर भूमि के सुधार तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। इसलिए सभी अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद स्थापित करें, उन्हें योजनाओं की जानकारी दें तथा अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं से जोड़ते हुए शत-प्रतिशत लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।

समीक्षा के दौरान पाया गया कि भूमि संरक्षण इकाई राष्ट्रीय जलागम द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना (बीहड़ बंजर सुधार) के अंतर्गत 501.86 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 300 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कार्य कराया गया है। वहीं खेत तालाब योजना के अंतर्गत 230 तालाबों के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 9 तालाबों का ही निर्माण कराया गया है।

इसी प्रकार भूमि संरक्षण इकाई राष्ट्रीय जलागम प्रथम द्वारा 300 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 190 हेक्टेयर में कार्य कराया गया है तथा 230 खेत तालाबों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 10 तालाब बनाए गए हैं। भूमि संरक्षण इकाई राष्ट्रीय जलागम द्वितीय द्वारा 630 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष 294 हेक्टेयर में कार्य कराया गया है, जबकि 230 खेत तालाबों के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 12 तालाब ही बनाए गए हैं। वहीं भूमि संरक्षण इकाई डीपीएपी द्वारा 552 हेक्टेयर के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 195 हेक्टेयर में ही कार्य कराया गया है तथा 230 खेत तालाबों के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 10 तालाबों का निर्माण किया गया है।

प्रगति अपेक्षित न मिलने पर जिलाधिकारी ने चारों इकाइयों के अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करते हुए कार्यों में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि कराए गए सभी कार्यों का स्थलवार फोटो प्रलेखन तैयार कर पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, ताकि कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड में सक्रिय रहकर नियमित मॉनिटरिंग करने तथा किसानों को योजनाओं से जोड़ते हुए जल संरक्षण एवं भूमि सुधार के कार्यों को अभियान के रूप में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, जिससे अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सकें।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, उप कृषि निदेशक एस.के. उत्तम, भूमि संरक्षण अधिकारी गौरव यादव, भूमि संरक्षण अधिकारी मधुवेश पाठक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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