ब्रिटेन/एजेंसी। ब्रिटेन में पढ़ाई के लिए जाने वाले मुस्लिम देशों के छात्रों को लेकर चिंता गहराती जा रही है। कई मुस्लिम देशों को आशंका है कि उनके छात्र ब्रिटेन में कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में आकर आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसी डर के चलते कुछ देशों ने ब्रिटेन भेजे जाने वाले छात्रों की निगरानी बढ़ा दी है और कई मामलों में छात्रों को वापस बुलाने तक का फैसला किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ मुस्लिम देशों को जानकारी मिली है कि ब्रिटिश विश्वविद्यालय परिसरों में कुछ ऐसे संगठन सक्रिय हैं, जिन पर मुस्लिम ब्रदरहुड और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क का प्रभाव माना जाता है। इन संगठनों के माध्यम से छात्रों को वैचारिक रूप से प्रभावित किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
हाल के वर्षों में इस विषय पर तब ज्यादा चर्चा शुरू हुई जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खबरें सामने आईं कि ब्रिटेन के कुछ विश्वविद्यालय परिसरों में चरमपंथी विचारधाराओं का प्रसार हो रहा है। हालांकि, ब्रिटिश प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनका कहना है कि कैंपस पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा किसी भी तरह की अवैध गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाती।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2015 में ब्रिटेन सरकार द्वारा कराई गई एक व्यापक जांच के बाद यह स्वीकार किया गया था कि कुछ समूह शिक्षा संस्थानों के माध्यम से अपने विचारों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी रिपोर्ट के बाद कई मुस्लिम देशों ने अपने छात्रों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी।
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड की चिंता
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम ब्रदरहुड एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1928 में मिस्र में हुई थी। इस संगठन पर कई देशों में कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और युवाओं को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, ब्रिटेन में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित नहीं किया गया है, लेकिन इसकी गतिविधियों पर सरकार की नजर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर वैचारिक प्रभाव बढ़ाना आज वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है, और इसी कारण मुस्लिम देश अपने छात्रों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।