प्रत्येक समिति पर पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश, अनियमितता मिलने पर 13 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस
संवाददाता
उरई/जालौन
उरई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर जनपद में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनपद में उर्वरकों की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं किसान हितैषी बनाए रखने की है।
जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े और उर्वरक वितरण में किसी भी स्तर पर कालाबाजारी अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रत्येक पैक्स एवं सहकारी समिति पर किसानों की सुविधा के अनुरूप अतिरिक्त मानव संसाधन की व्यवस्था करने तथा खतौनी का सत्यापन करने के बाद ही किसानों को उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उर्वरक की एक भी बोरी की कालाबाजारी न होने पाए। इसके लिए पूरे वितरण तंत्र की लगातार निगरानी की जाए और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रत्येक समिति पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे यूरिया और डीएपी
बैठक के दौरान आईएफएमएस पोर्टल पर उपलब्ध उर्वरक स्टॉक की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि खरीफ फसलों की बुवाई एवं रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है, ऐसे में जनपद की सभी सहकारी समितियों पर यूरिया एवं डीएपी का पर्याप्त स्टॉक लगातार बनाए रखना आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों एवं जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए कि प्रत्येक समिति पर न्यूनतम 22 से 25 मीट्रिक टन यानी लगभग 500 से 550 बोरी यूरिया तथा 15 से 18 मीट्रिक टन यानी लगभग 300 से 360 बोरी डीएपी हर समय उपलब्ध रहे।
उन्होंने बताया कि पीसीएफ के बफर गोदामों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। इसलिए संबंधित समितियों पर आवश्यकता के अनुसार तत्काल अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए और किसानों की मांग के अनुरूप नियमित अनुश्रवण किया जाए।
उर्वरक विक्रेताओं के निरीक्षण में मिलीं अनियमितताएं
समीक्षा बैठक के दौरान जिला कृषि अधिकारी द्वारा कालपी एवं आटा क्षेत्र के विभिन्न उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों के निरीक्षण एवं स्थलीय सत्यापन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। निरीक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठानों पर विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं सामने आईं।
कुछ प्रतिष्ठानों पर पीओएस मशीन में प्रदर्शित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया। इससे बिना पीओएस मशीन में प्रविष्टि किए उर्वरक बिक्री किए जाने की आशंका सामने आई। इसके अलावा कई प्रतिष्ठानों पर स्टॉक एवं विक्रय पंजिका अपूर्ण मिली, जबकि कुछ स्थानों पर पिछले वर्ष की पंजिका का ही संचालन किया जाना पाया गया।
निरीक्षण के दौरान कई दुकानों पर स्टॉक बोर्ड एवं निर्धारित मूल्य सूची भी प्रदर्शित नहीं मिली। अधिकारियों के अनुसार यह उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
13 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस
गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी द्वारा 13 उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित विक्रेताओं को एक सप्ताह के भीतर साक्ष्यों सहित अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित प्रतिष्ठानों से प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अगस्त-सितंबर में किसानों को नहीं होने दी जाएगी खाद की किल्लत
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि खाद वितरण में किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के साथ-साथ अधिकारियों द्वारा नियमित फील्ड भ्रमण कर उर्वरक वितरण व्यवस्था की निगरानी की जाए। समितियों एवं विक्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़, उपलब्ध स्टॉक और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि किसानों को बुवाई एवं रोपाई के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने कहा कि अगस्त एवं सितंबर माह में खरीफ फसलों के पीक सीजन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। किसानों को उर्वरक की कमी नहीं होने दी जाएगी और कालाबाजारी अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।