संवाददाता
प्रयागराज। प्रदेश में आयोजित एक भर्ती परीक्षा को लेकर नया विवाद सामने आया है। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में त्रुटियां होने का आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कुल 125 प्रश्नों में से 35 प्रश्न या तो गलत थे, उनके उत्तर विकल्प त्रुटिपूर्ण थे अथवा प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए। इस मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और परीक्षा परिणाम पर रोक लगाने सहित निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा के बाद विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नपत्र का विश्लेषण किया गया, जिसमें कई प्रश्नों की शुद्धता पर गंभीर सवाल उठे। उनका दावा है कि यदि इन प्रश्नों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया तो हजारों अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि विवादित प्रश्नों को हटाया जाए या सभी अभ्यर्थियों को उन प्रश्नों के अंक प्रदान किए जाएं।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई याचिका
मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी (Answer Key) की विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जाए। साथ ही अंतिम परिणाम जारी करने से पहले विवादित प्रश्नों पर उचित निर्णय लिया जाए।
विशेषज्ञ समिति की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने में गंभीर लापरवाही बरती गई है। कई प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर सही बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ प्रश्नों का कोई भी उत्तर सही नहीं है। ऐसे में स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों की समिति गठित कर पूरे प्रश्नपत्र की दोबारा समीक्षा कराई जानी चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवाल
इस विवाद के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के भविष्य के साथ किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और मेरिट आधारित होनी चाहिए।
कोर्ट के निर्णय पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
फिलहाल इस मामले में सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि न्यायालय प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानता है तो संबंधित परीक्षा प्राधिकरण से जवाब तलब किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की आगामी कार्रवाई तय होगी।
भर्ती परीक्षा से जुड़े इस विवाद ने हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं तथा अभ्यर्थियों की आपत्तियों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।