संवाददाता | उरई/जालौन
जनपद जालौन में गौवंश संरक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल माध्यम द्वारा सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलटी टू एनीमल एवं गौसंरक्षण अनुश्रवण मूल्यांकन समीक्षा समिति की बैठक की। बैठक में संबंधित अधिकारियों को गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि गौवंशों की सुरक्षा, देखभाल एवं संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी गौ आश्रय स्थलों पर पानी, हरा चारा, भूसा एवं छायादार व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित की जाए, ताकि भीषण गर्मी और लू के दौरान गौवंशों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने हरे चारे की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक संबंधित ग्राम पंचायत में दो किसानों से अनुबंध कराने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक गौ आश्रय स्थल पर 8-8 घंटे की शिफ्ट में तीन केयरटेकर तैनात करने को कहा, जिससे 24 घंटे गौवंशों की निगरानी और देखभाल सुनिश्चित हो सके।
बैठक में गौशालाओं की निगरानी हेतु लगाए गए 68 सीसीटीवी कैमरे बंद पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित खंड विकास अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। वहीं जालौन गौशाला में रखरखाव में कमी और सीसीटीवी कैमरे बंद मिलने पर संबंधित खंड विकास अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश भी जारी किए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गौवंशों को तत्काल गौशालाओं में पहुंचाया जाए तथा इसके लिए विशेष ड्यूटी लगाई जाए। जिन स्थानों पर गौशालाओं का विलय किया गया है, वहां पुराने शेड एक सप्ताह के भीतर हटाकर गौवंशों को व्यवस्थित रूप से एकीकृत स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने नोडल अधिकारियों को लगातार गौशालाओं का भ्रमण कर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा तथा स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने उन पशुपालकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जो दूध निकालने के बाद गौवंशों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये, दूसरी बार 1000 रुपये जुर्माना लगाया जाए तथा तीसरी बार पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में परियोजना निदेशक, जिला विकास अधिकारी निशांत पाण्डेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।