साक्ष्य प्रक्रिया को प्रभावी बनाने, सम्मन-वारंट की समयबद्ध तामिला और पुराने मामलों की प्राथमिकता से पैरवी पर जोर
संवाददाता
कानपुर देहात।
जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित मां मुक्तेश्वरी देवी सभागार में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में न्यायालयों में लंबित वादों, साक्ष्य प्रक्रिया, सम्मन एवं वारंट की तामिला तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अमित कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जयगोविंद, अभियोजन विभाग के अधिकारी, शासकीय अधिवक्तागण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि साक्ष्य के लिए नियत मामलों में सम्मनों की समयबद्ध तामिला सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही न्यायालयों द्वारा जारी किए गए वारंटों का शत-प्रतिशत निष्पादन कराया जाए, ताकि न्यायालयीय कार्यवाही में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि न्यायालय में साक्ष्य देने वाले साक्षियों तथा विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वर्तमान तैनाती स्थल का सत्यापन कर उनकी सही जानकारी समय से उपलब्ध कराई जाए। इससे न्यायालय में साक्ष्य की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के साथ-साथ लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सकेगी।
ऑनलाइन साक्ष्य की व्यवस्था पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ऑनलाइन माध्यम से साक्ष्य दर्ज कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुगम, प्रभावी एवं समयबद्ध बन सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
10 वर्ष से अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता
बैठक में जिलाधिकारी ने 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी करते हुए उनके शीघ्र निस्तारण की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जाए। लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर उनकी प्रगति पर नजर रखने के भी निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने न्यायालयों में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी अभिलेखों को पूर्ण, अद्यतन एवं समय से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए न्यायालयीय कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करने तथा प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अभियोजन कार्यों में प्रभावी पैरवी और बेहतर विभागीय समन्वय से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सकती है।