यूपी ग्रीन हाइड्रोजन में टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर

स्वच्छ व सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक पर होगा फोकस, 50 करोड़ तक की सहायता

संवाददाता — लखनऊ

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी लीडर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों का विकास करना तथा लागत को न्यूनतम करना है।

इस रणनीति के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के माध्यम से विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के जरिए उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिससे अत्याधुनिक लैब और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें।

सरकार का लक्ष्य है कि ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को घटाकर उत्तर प्रदेश को देश का ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी हब बनाया जाए। इस दिशा में राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। स्टार्टअप्स को 5 साल तक हर वर्ष 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है, बशर्ते वे किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान या इनक्यूबेटर से जुड़े हों।

प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट गोरखपुर में स्थापित किया गया है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा किया जा चुका है। अनुमान है कि इस प्लांट के माध्यम से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा, राज्य में कई अन्य जिलों में हाइड्रोजन पाइपलाइन परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।

सरकार का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका को मजबूत करेगी और वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही, इससे युवाओं को शोध, नवाचार और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा उद्योगों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध होगी।

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