संवाददाता
उरई/जालौन।
जन शिक्षण संस्थान जालौन (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली) के कार्यालय परिसर में भगवान विश्वकर्मा जयंती हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, मास्टर ट्रेनरों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राहुल सिंह ने भगवान विश्वकर्मा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का प्रथम वास्तुकार, अभियंता एवं दिव्य शिल्पकार माना जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती निर्माण, तकनीक, शिल्प एवं कौशल से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।
उन्होंने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित सेवा कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उपस्थित लोगों से शाम 6 से 7 बजे के बीच प्रधानमंत्री के दीर्घायु जीवन की कामना के लिए एक दीपक जलाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के अवसर पर देशभर में विश्वकर्मा पूजा एवं विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। यह दिवस औद्योगिक विकास, श्रम एवं कौशल के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर कारखानों, उद्योगों, वर्कशॉप एवं तकनीकी संस्थानों में मशीनों, कंप्यूटरों तथा औजारों की पूजा की जाती है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार एवं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने जन शिक्षण संस्थान जालौन द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद युवक-युवतियों को स्वरोजगारपरक एवं हुनर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि श्री बीरेन्द्र कुमार ने भगवान विश्वकर्मा को निर्माण कला, विज्ञान, तकनीक एवं औजारों का अधिष्ठाता देवता बताते हुए कहा कि विश्वकर्मा जयंती का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास समाज एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भी उपस्थित लोगों से प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर शाम 6 से 7 बजे के बीच दीप प्रज्ज्वलित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए जन शिक्षण संस्थान जालौन के निदेशक श्री कन्हैया लाल वैश्य ने भगवान विश्वकर्मा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को इंजीनियरों, वास्तुकारों, शिल्पकारों, लोहारों, बढ़ई, स्वर्णकारों तथा निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों का मार्गदर्शक एवं संरक्षक माना जाता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि वे संस्थान द्वारा संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाकर अपने हुनर को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ें।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों एवं प्रतिभागियों द्वारा भगवान विश्वकर्मा के छायाचित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण किया गया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर सम्मानित अतिथियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को उनके द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों के लिए जन शिक्षण संस्थान के लोगो लगे मेडल देकर सम्मानित किया गया। वहीं प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के सफल संचालन की जिम्मेदारी संस्थान निदेशक श्री कन्हैया लाल वैश्य ने निभाई। अतिथियों के प्रति आभार कार्यक्रम अधिकारी श्री रंजीत सिंह एवं श्री विशाल गुप्ता द्वारा संयुक्त रूप से व्यक्त किया गया। अतिथियों का स्वागत सहायक कार्यक्रम अधिकारी सुश्री नसरीन बानो एवं सुश्री सोनाली अग्निहोत्री के संयुक्त नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की फोटोग्राफी मु. शमीम अहमद के नेतृत्व में सत्येन्द्र द्वारा की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, मास्टर ट्रेनरों तथा उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों का विशेष योगदान रहा।