रहन-सहन, खानपान, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का लिया जायजा
संवाददाता / उरई-जालौन
उरई। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को न्यायिक अधिकारियों द्वारा जनपद जालौन में संचालित वृद्धाश्रम एवं आश्रय गृह का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दोनों आश्रय स्थलों में रह रहे लोगों की रहन-सहन, खानपान, चिकित्सा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया तथा संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
वृद्धाश्रम में 122 संवासी मिले उपस्थित
न्यायिक अधिकारियों की टीम ने सबसे पहले समाज कल्याण विभाग द्वारा राठ रोड, उरई में स्वैच्छिक संस्था शिवा ग्रामोत्थान सेवा संस्था, एफ-473 गुजैनी, रतनलाल नगर, कानपुर नगर के सहयोग से संचालित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम में 122 संवासी उपस्थित मिले। आश्रय गृह के हॉल में प्रवेश करने पर कई वृद्धजन श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते हुए पाए गए। उपस्थित पंजिका के अवलोकन में रात्रिकालीन कर्मचारीगण एवं स्टाफ नर्स श्रीमती अर्चना को छोड़कर अन्य सभी कर्मचारी उपस्थित मिले।
स्टाफ नर्स श्रीमती अर्चना की अनुपस्थिति के संबंध में प्रबंधक से जानकारी ली गई। प्रबंधक द्वारा बताया गया कि स्टाफ नर्स संवासियों के उपचार के लिए जिला अस्पताल गई हुई हैं।
न्यायिक अधिकारियों ने वृद्धाश्रम में रह रहे संवासियों से बातचीत कर यह जानकारी ली कि उन्हें चाय-नाश्ता तथा सुबह-शाम का भोजन समय से मिल रहा है अथवा नहीं। संवासियों ने बताया कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके बाद वृद्धाश्रम की मेडिकल डिस्पेंसरी का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने संवासियों को चिकित्सा एवं प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के लिए डिस्पेंसरी में मौजूद आवश्यक दवाओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान किसी भी संवासी द्वारा किसी प्रकार की समस्या नहीं बताई गई।
आश्रय गृह में टूटी खिड़कियां और नाली मिली
इसके बाद न्यायिक अधिकारियों द्वारा नगर पालिका परिषद उरई के सहयोग से मोहल्ला लहरियापुरवा में लखनऊ के एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह (शेल्टर होम) का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के समय आश्रय गृह में प्रबंधक मौजूद नहीं मिलीं। चौकीदार से जानकारी लेने पर बताया गया कि प्रबंधक अपनी बेटी के उपचार के लिए अस्पताल गई हुई हैं।
अधिकारियों ने आश्रय गृह की आश्रित पंजिका का भी अवलोकन किया। निरीक्षण की तिथि में पंजिका में कोई भी आश्रित पंजीकृत नहीं पाया गया।
शेल्टर होम के कमरों का निरीक्षण करने पर कुछ खिड़कियां टूटी हुई मिलीं। अधिकारियों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से गंभीरता से लेते हुए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, क्योंकि टूटी खिड़कियों के कारण जहरीले कीटों के अंदर प्रवेश करने की आशंका बनी हुई है।
इसके अलावा शेल्टर होम में प्रवेश करने वाले स्थान पर बनी नाली भी टूटी हुई मिली। इसके संबंध में संबंधित विभाग से पत्राचार कर आवश्यक कार्रवाई कराने के लिए निर्देशित किया गया।
अनुश्रवण समिति में ये अधिकारी रहे शामिल
निरीक्षण करने वाली अनुश्रवण समिति में अपर जिला जज प्रथम श्री सतीश चन्द्र द्विवेदी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अभिषेक खरे एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा शामिल रहीं। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन स्थान उरई के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला भी उपस्थित रहे।
वन स्टॉप सेंटर का भी किया औचक निरीक्षण
इसके उपरांत माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा माननीय जनपद न्यायाधीश जालौन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर, उरई का भी औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान सेंटर मैनेजर श्रीमती अंजना यादव, मनो-परामर्शदाता श्रीमती रागिनी एवं स्टाफ नर्स श्रीमती शारदा पाल सहित ड्यूटी पर तैनात समस्त कर्मचारी उपस्थित मिले।
सचिव द्वारा महिला कल्याण विभाग, जनपद जालौन द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिए उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की समीक्षा की गई। इसमें विभिन्न हितधारकों एवं सेवा प्रदाताओं के साथ अभिमुखीकरण, परामर्श, विधिक सहायता, चिकित्सा सुविधा, पुलिस रिपोर्टिंग तथा रेस्क्यू सुविधा आदि की स्थिति की जानकारी ली गई।
निरीक्षण के समय सेंटर पर कोई पीड़िता मौजूद नहीं मिली। पीड़िताओं की सुरक्षा एवं उनके पुनर्स्थापन के संबंध में प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। वहीं एक पीड़िता को विवेचक के साथ न्यायालय में पेशी के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई।
सखी वन स्टॉप सेंटर प्रशासन को सभी कमरों की प्रतिदिन नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन, कीटनाशक का छिड़काव तथा समय-समय पर फॉगिंग कराने के भी निर्देश दिए गए, ताकि सेंटर में स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखा जा सके।