न्यायिक अधिकारियों ने वृद्धाश्रम, आश्रय गृह एवं जिला कारागार का किया औचक निरीक्षण

उच्च न्यायालय के निर्देश पर हुई जांच, आश्रितों एवं बंदियों की सुविधाओं का लिया जायजा; व्यवस्थाओं में सुधार के दिए आवश्यक निर्देश

संवाददाता | उरई/जालौन

उरई। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को न्यायिक अधिकारियों की अनुश्रवण समिति द्वारा जनपद जालौन में संचालित विभिन्न आश्रय स्थलों एवं जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वहां रह रहे आश्रितों एवं निरुद्ध बंदियों के रहन-सहन, खानपान, चिकित्सा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की बारीकी से जांच की।

न्यायिक अधिकारियों ने संबंधित संस्थानों की व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण करते हुए कर्मचारियों एवं संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

वृद्धाश्रम में 126 संवासी मिले उपस्थित

निरीक्षण दल ने सबसे पहले राठ रोड, उरई स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। यह वृद्धाश्रम समाज कल्याण विभाग द्वारा स्वैच्छिक संस्था शिवा ग्रामोत्थान सेवा संस्था, एफ-473 गुजैनी, रतनलाल नगर, कानपुर नगर के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम में 126 संवासी उपस्थित मिले। उपस्थित पंजिका का अवलोकन करने पर रात्रिकालीन कर्मचारीगण एवं स्टाफ नर्स श्रीमती अर्चना को छोड़कर अन्य सभी कर्मचारी उपस्थित पाए गए।

स्टाफ नर्स श्रीमती अर्चना की अनुपस्थिति के संबंध में उपस्थित कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि वह संवासियों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज गई हुई हैं।

निर्धारित मेन्यू के अनुसार मिल रहा भोजन

न्यायिक अधिकारियों ने वृद्धाश्रम में रह रहे संवासियों से सीधे बातचीत कर उनके खानपान एवं अन्य सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। उनसे पूछा गया कि उन्हें चाय-नाश्ता तथा सुबह-शाम का भोजन समय से मिल रहा है या नहीं।

इस पर संवासियों ने बताया कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसके बाद अधिकारियों ने वृद्धाश्रम की मेडिकल डिस्पेंसरी का निरीक्षण किया। वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं एवं आवश्यक दवाओं के संबंध में स्टाफ नर्स से जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा एवं प्राथमिक उपचार से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। किसी भी संवासी द्वारा किसी प्रकार की विशेष समस्या की जानकारी नहीं दी गई।

जिला कारागार उरई का भी किया निरीक्षण

वृद्धाश्रम के निरीक्षण के बाद समस्त न्यायिक अधिकारीगण द्वारा जिला कारागार उरई का भ्रमण किया गया। अधिकारियों ने कारागार की विभिन्न बैरकों का निरीक्षण करते हुए वहां निरुद्ध बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

अधिकारियों ने बंदियों से उनके रहन-सहन, खानपान, चिकित्सा तथा अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इस दौरान जेल प्रशासन के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

जमानत हो चुकी, लेकिन जमानतगीर के अभाव में बंद बंदियों की सूची मांगी

निरीक्षण के दौरान सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा ने विशेष रूप से उन बंदियों के संबंध में जानकारी ली, जिनकी सक्षम न्यायालय से जमानत स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर उपलब्ध न होने के कारण वे अभी तक जेल से रिहा नहीं हो सके हैं।

उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि ऐसे सभी बंदियों की सूची अविलंब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन स्थान उरई के कार्यालय में उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित बंदियों के मामलों में प्रभावी पैरवी करते हुए उन्हें शीघ्र कारागार से रिहा कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

इसके साथ ही न्यायिक अधिकारियों ने जिला कारागार की विभिन्न बैरकों के साथ-साथ पाकशाला का भी निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

आश्रय गृह में भी व्यवस्थाओं की जांच

इसके उपरांत न्यायिक अधिकारियों ने नगर पालिका परिषद उरई के सहयोग से मुहल्ला लहरियापुरवा में लखनऊ की एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह (शेल्टर होम) का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान आश्रय गृह की विभिन्न व्यवस्थाओं की जांच की गई। अधिकारियों ने विशेष रूप से चिकित्सा एवं बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया।

मेडिकल डिस्पेंसरी में दवाएं व्यवस्थित मिलीं

आश्रय गृह की मेडिकल डिस्पेंसरी के निरीक्षण के दौरान उपलब्ध दवाओं की स्थिति की जांच की गई। निरीक्षण में समस्त दवाएं सही एवं व्यवस्थित पाई गईं।

आश्रित पंजिका का अवलोकन करने पर निरीक्षण की तिथि को आश्रय गृह में कोई भी आश्रित पंजीकृत नहीं मिला। अधिकारियों को जानकारी दी गई कि पूर्व के कई महीनों से एसडीआरएफ की टीम आश्रय गृह में रुकी हुई थी।

व्यवस्थाओं में लापरवाही न बरतने के निर्देश

न्यायिक अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान संबंधित कर्मचारियों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया कि आश्रय स्थलों, वृद्धाश्रम एवं कारागार में रहने वाले लोगों को शासन एवं नियमानुसार सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। विशेष रूप से स्वास्थ्य, स्वच्छता, भोजन, सुरक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं पर लगातार निगरानी रखी जाए।

निरीक्षण का उद्देश्य संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना तथा जरूरतमंद एवं आश्रित लोगों को उनके अधिकारों एवं निर्धारित सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित कराना रहा।

अनुश्रवण समिति में ये अधिकारी रहे शामिल

निरीक्षण करने वाली अनुश्रवण समिति में अपर जिला जज प्रथम श्री सतीश चन्द्र द्विवेदी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अभिषेक खरे एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती मनाली चन्द्रा शामिल रहीं।

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन स्थान उरई के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक सुधार एवं अनुपालन के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।

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