दाम्पत्य विवादों सहित अधिक से अधिक मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराने पर जोर
संवाददाता | उरई/जालौन
उरई। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत दिनांक 12 सितंबर 2026 को सफल बनाने के उद्देश्य से परिवार न्यायालय, जालौन स्थान उरई में अनुश्रवण राष्ट्रीय लोक अदालत समिति की तृतीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक 21 अगस्त 2026 को अपराह्न 4:30 बजे परिवार न्यायालय, जालौन स्थान उरई के नवनिर्मित भवन में वादकारियों के बैठने हेतु बनाए गए प्रतीक्षालय एवं परामर्शदाता केंद्र में आयोजित हुई। बैठक माननीय प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, जालौन स्थान उरई श्री मनोज कुमार सिंह गौतम के कुशल निर्देशन में तथा अध्यक्ष/नोडल अधिकारी श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, जालौन स्थान उरई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
दाम्पत्य विवादों के अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण पर जोर
बैठक में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों एवं उसकी सफलता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि दाम्पत्य विवादों से संबंधित सभी प्रकार के वादों को सुलह-समझौते के आधार पर अधिक से अधिक संख्या में निस्तारित कराने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।
बैठक में कहा गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों के बीच आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर विवादों का समाधान कराने का प्रयास किया जाए, जिससे दोनों पक्षों को शीघ्र न्याय मिल सके और लंबे समय से चल रहे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो।
पक्षकारों के बीच लगातार कराई जा रही मध्यस्थता
बैठक में उपस्थित परिवार कल्याण विशेषज्ञ सुश्री प्रियंका द्विवेदी एवं परामर्शदाता श्री के.के. प्रजापति ने बताया कि न्यायालय से लिटिगेशन हेतु प्राप्त होने वाली पत्रावलियों में मध्यस्थता की प्रक्रिया कराई जा रही है। इसके साथ ही संबंधित वादकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है तथा नियत तिथियों पर दोनों पक्षों के बीच सुलह-वार्ता कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पक्षकारों के बीच आपसी संवाद एवं समझ कायम कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराया जा सके।
मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान का प्रयास
बैठक में उपस्थित सदस्य एवं मध्यस्थगण ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। पक्षकारों के बीच मध्यस्थता कराकर उनके विवादों का आपसी सहमति से समाधान कराने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को समय एवं धन की बचत के साथ-साथ आपसी संबंधों को बेहतर बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।
अधिवक्ताओं ने भी सहयोग का दिया आश्वासन
बैठक में उपस्थित विद्वान अधिवक्तागण ने भी आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अधिवक्ताओं ने कहा कि अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण के लिए पक्षकारों को सुलह-समझौते के लिए समझाने तथा उन्हें आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों, मध्यस्थों, परामर्शदाताओं एवं अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
ये लोग रहे उपस्थित
बैठक में सदस्य/सदर मुंसरिम श्री काजी वसीम उल्ला, सदस्य/मध्यस्थ श्रीमती सुलेखा सिंह, श्री विनोद प्रकाश व्यास सहित विद्वान अधिवक्तागण श्री अंशुमान दीक्षित एडवोकेट, श्री राहुल मिश्रा एडवोकेट, श्री धीरेन्द्र भदौरिया एडवोकेट, श्री कृष्णपाल सिंह एडवोकेट, श्री कर्मक्षेत्र अवस्थी एडवोकेट, श्री अनिरुद्ध एडवोकेट आदि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 को सफल बनाने तथा अधिक से अधिक वादों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।