प्रदर्शनकारियों ने काफिले को रोककर कार पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके; मुख्यमंत्री ने पुलिस की मौजूदगी में घटना होने पर उठाए सवाल
एजेंसी
नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हल्दिया में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हमले का सामना करना पड़ा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के काफिले को रोककर उनकी गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके। घटना के बाद ममता बनर्जी ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए और राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
घटना उस समय हुई, जब ममता बनर्जी एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को लेकर हल्दिया में प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने ममता बनर्जी के काफिले को रोक दिया और विरोध जताते हुए उनकी गाड़ी पर हमला किया।
बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने काफिले को चारों ओर से घेर लिया। प्रदर्शनकारियों की ओर से ममता बनर्जी की गाड़ी पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके गए। इस दौरान मौके पर काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।
ममता बनर्जी बोलीं- खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा सिर फट जाता
घटना के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के सामने ही उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने कहा कि यदि कार की खिड़कियां खुली होतीं तो उनका सिर फट सकता था।
ममता बनर्जी ने घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस के सामने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस तरह की घटना पुलिस के सामने कैसे हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पुलिस भाजपा को सुरक्षा दे रही है। उन्होंने घटना को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद गंभीर हैं।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्य सरकार को घेरा
ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले को लेकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के काफिले पर हमला गंभीर मामला है और इस तरह की घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने पुलिस विभाग का 12 बजे दिया है। उन्होंने घटना के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस मौके पर मौजूद थी, तब प्रदर्शनकारियों को काफिले के पास पहुंचने और हमला करने से क्यों नहीं रोका गया।
दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं ममता
ममता बनर्जी जिस समय घटना का शिकार हुईं, उस समय वह एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। जानकारी के अनुसार, संबंधित टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने के लिए ममता बनर्जी हल्दिया पहुंची थीं।
बताया गया कि कार्यकर्ता की शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसी मामले को लेकर इलाके में तनाव और विरोध प्रदर्शन का माहौल बना हुआ था। परिवार और स्थानीय लोगों की ओर से मामले में गंभीर सवाल उठाए जा रहे थे।
ममता के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे प्रदर्शनकारी
ममता बनर्जी के हल्दिया पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने उनके कार्यक्रम का विरोध किया और काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने ममता बनर्जी की गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया।
आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर पत्थर और ईंटें भी फेंकीं। इसके अलावा ममता बनर्जी की कार पर कीचड़, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके गए। घटना के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
पुलिस पर भी उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि हमला पुलिस के सामने हुआ। उन्होंने कहा कि यदि वाहन की खिड़कियां खुली होतीं तो पत्थर लगने से उन्हें गंभीर चोट लग सकती थी।
उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह का हमला होना राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय करने की मांग की और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए।
टीएमसी कार्यकर्ता की मौत को लेकर पहले से था तनाव
यह पूरा विवाद एक टीएमसी कार्यकर्ता की मौत से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ता की शुक्रवार को पुलिस कस्टडी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई।
परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। बताया गया कि परिवार का आरोप है कि पुलिस ने कार्यकर्ता को हिरासत में लेने के बाद कथित तौर पर प्रताड़ित किया था। अगले दिन वह पुलिस लॉकअप में अचेत अवस्था में मिले थे।
घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया और प्रदर्शन शुरू हो गए। इसी बीच ममता बनर्जी मृतक के परिवार से मिलने पहुंचीं, जहां उनके काफिले को प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा।
मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमाई
ममता बनर्जी के काफिले पर हमले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। टीएमसी ने घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि किसी मुख्यमंत्री के काफिले की सुरक्षा के दौरान इस तरह की घटना होती है तो यह गंभीर सुरक्षा चूक का मामला है।
वहीं, घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों की ओर से भी अपनी मांगों और विरोध के कारण बताए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने तथा पूरे मामले की जांच की जा रही है।
कानून-व्यवस्था को लेकर ममता ने सरकार को घेरा
ममता बनर्जी ने घटना के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस के सामने इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और किसी के वाहन पर हमला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
घटना की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
टीएमसी नेताओं ने मांग की है कि ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही पुलिस की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
फिलहाल घटना के बाद हल्दिया में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। ममता बनर्जी के काफिले पर हुए इस हमले ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक टकराव को लेकर बहस तेज कर दी है।