विकास परियोजनाओं में अब तारीख नहीं, परिणाम की होगी समीक्षा—डीएम समीर

90 प्रतिशत से अधिक पूर्ण परियोजनाएं 15 अक्टूबर तक हर हाल में पूरी हों, देरी पर तय होगी जवाबदेही

संवाददाता / उरई-जालौन

उरई। जिलाधिकारी समीर ने विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली महत्वपूर्ण एवं निर्माणाधीन विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समय-सीमा और आमजन को मिलने वाले लाभ की विस्तार से समीक्षा की। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब विकास परियोजनाओं की समीक्षा केवल फाइलों में दर्ज प्रगति अथवा निर्धारित तारीखों के आधार पर नहीं होगी, बल्कि धरातल पर कार्य की वास्तविक स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता और परियोजना से जनता को मिल रहे लाभ को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, उन्हें प्रत्येक दशा में 15 अक्टूबर तक पूर्ण कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित परियोजनाओं की आवश्यक औपचारिकताएं भी समय से पूरी कराई जाएं और पूर्ण परियोजनाओं को तत्काल संबंधित विभाग को हस्तांतरित किया जाए, ताकि उनका उपयोग आमजन के हित में किया जा सके।

कम प्रगति वाली परियोजनाओं के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना

समीक्षा बैठक में कम प्रगति वाली विभिन्न परियोजनाओं पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षाकृत कम है, उनके लिए अलग से विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए और उसकी नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए।

समीक्षा के दौरान डायट जालौन की परियोजना में 14 प्रतिशत, राजकीय हाईस्कूल खारका के उच्चीकरण कार्य में शून्य प्रतिशत तथा मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय में 5.5 प्रतिशत प्रगति पाई गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इन परियोजनाओं में तेजी लाते हुए निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना के निर्माण में भूमि, बजट, तकनीकी स्वीकृति या विभागीय समन्वय से संबंधित कोई समस्या आ रही है तो उसे लंबित न रखा जाए। संबंधित अधिकारी समस्या को तत्काल उच्च स्तर पर संज्ञान में लाते हुए उसका समाधान सुनिश्चित करें, ताकि निर्माण कार्य प्रभावित न हो।

गौ संरक्षण केंद्र में देरी पर कार्यदायी संस्था को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

जिलाधिकारी ने गोपालपुर, बंधा में गौ संरक्षण केंद्र के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी पाए जाने पर उन्होंने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर विकास परियोजनाओं को पूरा कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकारी परियोजनाओं में देरी से न केवल लागत और समय प्रभावित होता है, बल्कि आमजन को मिलने वाला लाभ भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाता।

मिनी स्टेडियम का निर्माण 10 अक्टूबर तक पूरा कराने के निर्देश

बैठक में जिलाधिकारी ने आवास विकास कार्यदायी संस्था द्वारा कराए जा रहे मिनी स्टेडियम के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित संस्था को निर्देश दिए कि मिनी स्टेडियम का निर्माण कार्य 10 अक्टूबर तक प्रत्येक दशा में पूर्ण कराया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिन परियोजनाओं का कार्य अंतिम चरण में है, उनमें उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए शेष कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाए। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

अनुपस्थित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब

समीक्षा बैठक में जल निगम अर्बन के अधिशासी अभियंता हिमांशु नेगी तथा सिडको के अधिशासी अभियंता जे.बी. सिंह के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति आवश्यक है। अधिकारी अपने विभाग से संबंधित परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत रहें और समीक्षा के दौरान आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।

अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर करें निर्माण कार्यों का सत्यापन

जिलाधिकारी समीर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालय में बैठकर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा न करें, बल्कि स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का स्थलीय सत्यापन करें। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर निर्माण की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और कार्य की गति का परीक्षण किया जाए।

अधिकारियों को निर्माण कार्यों की फोटो सहित अद्यतन प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की वास्तविक जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे समय रहते कमियों को दूर कराया जा सके और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराया जा सके।

सरकारी धन का प्रभावी उपयोग और आमजन को लाभ पहुंचाना प्राथमिकता

जिलाधिकारी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में सरकार की बड़ी धनराशि खर्च होती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी की जिम्मेदारी है कि सरकारी धनराशि का प्रभावी एवं उचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उसका वास्तविक लाभ आमजन तक पहुंचे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी, लापरवाही और कागजी प्रगति को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। परियोजनाओं की समीक्षा अब उनके वास्तविक परिणाम और धरातलीय स्थिति के आधार पर की जाएगी तथा देरी के लिए संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एचएन प्रसाद, जिला पंचायत राज अधिकारी राम अयोध्या प्रसाद, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अमित सक्सेना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *