नाबालिग के अपहरण के मामले में 13 साल बाद आया फैसला, दोषी को 7 साल का सश्रम कारावास

50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया, जमा न करने पर भुगतना होगा तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास

संवाददाता
कानपुर देहात।

डेरापुर थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की के अपहरण के करीब 13 साल पुराने मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए दोषी देवेन्द्र शंखवार को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

2013 में दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस के अनुसार, 11 मई 2013 को वादी की नाबालिग पुत्री का अपहरण कर ले जाने के मामले में थाना डेरापुर में देवेन्द्र शंखवार पुत्र स्वर्गीय हीरालाल, निवासी गढ़ी दरवाजा, अमरौधा, थाना भोगनीपुर, जनपद कानपुर देहात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने 25 जनवरी 2014 को आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।

प्रभावी पैरवी के बाद दोषी करार

मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे)/फास्ट ट्रैक कोर्ट, कानपुर देहात ने आरोपी को दोषसिद्ध ठहराते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

पुलिस के अनुसार, ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत थाना डेरापुर पुलिस, कोर्ट पैरोकार, अभियोजन पक्ष और मॉनिटरिंग सेल ने मामले में प्रभावी पैरवी की। इसी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में साक्ष्य और गवाहों को प्रस्तुत करने में समन्वय किया गया।

गंभीर मामलों में सजा दिलाने पर जोर

पुलिस का कहना है कि ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के माध्यम से गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। 22 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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