जिलाधिकारी कपिल सिंह ने की जिला पोषण समिति की बैठक, कुपोषण उन्मूलन एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार पर दिए सख्त निर्देश

संवाददाता | कानपुर देहात

जनपद कानपुर देहात में कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को जिलाधिकारी कपिल सिंह की अध्यक्षता तथा मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल की उपस्थिति में जिला पोषण समिति की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट स्थित मां मुक्तेश्वरी देवी सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जनपद में संचालित विभिन्न पोषण कार्यक्रमों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, आंगनबाड़ी केंद्रों की गतिविधियों तथा संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी कपिल सिंह ने कहा कि पोषण केवल स्वास्थ्य विभाग या बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग का विषय नहीं है, बल्कि यह बहु-विभागीय समन्वय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला, धात्री माता, किशोरी एवं बच्चों तक सरकार की सभी पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का लाभ समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। किसी भी पात्र लाभार्थी को योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाए।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली, बच्चों के नियमित वजन एवं लंबाई मापन, गंभीर कुपोषित (SAM) एवं मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान, उनके उपचार तथा पोषण प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि चिन्हित कुपोषित बच्चों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी की जाए तथा स्वास्थ्य विभाग एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से उनके स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की भी समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC), आयरन एवं फोलिक एसिड की पर्याप्त उपलब्धता तथा संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है और स्वस्थ समाज की नींव मजबूत होगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम स्तर पर पोषण संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। पोषण पखवाड़ा, पोषण माह एवं अन्य जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से संतुलित आहार, स्वच्छता, स्तनपान, एनीमिया नियंत्रण तथा पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि आमजन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े।

बैठक में विभागवार लक्ष्यों एवं उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पोषण ट्रैकर पर शत-प्रतिशत डेटा फीडिंग सुनिश्चित की जाए तथा सभी लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति का नियमित सत्यापन किया जाए। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर आधारभूत सुविधाओं, पोषण सामग्री वितरण तथा अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पोषण संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग मिशन मोड में कार्य करते हुए नियमित मॉनिटरिंग करें और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करें, ताकि जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयगोविन्द, जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी आर.बी. सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी विकास पटेल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष सहित स्वास्थ्य, बाल विकास, शिक्षा, पंचायतीराज एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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