एजेंसी | काठमांडू
नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव कराए जाएंगे। इस बार चुनाव प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव करते हुए आधार-सहित मतदान प्रणाली लागू की जा रही है। नेपाल चुनाव आयोग ने यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से लिया है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार-सदृश पहचान प्रणाली को अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जी मतदान पर रोक लगाई जा सकेगी। आयोग ने बताया कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है, जब नेपाल का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और अन्य वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों एवं राजनीतिक उठापटक के बाद देश आम चुनाव की ओर बढ़ा है। हाल ही में प्रधानमंत्री पद पर रहे नेताओं द्वारा दिए गए इस्तीफों के बाद चुनाव की घोषणा को राजनीतिक स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
नेपाल चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने पहचान दस्तावेज समय रहते अपडेट कर लें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधार-सहित मतदान प्रणाली से नेपाल के चुनावी इतिहास में तकनीकी सुधार और पारदर्शिता का नया अध्याय जुड़ेगा।