लोकतंत्र को सशक्त बनाने पर मंथन, आचरण व निष्पक्षता पर जोर
संवाददाता — लखनऊ
लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। सम्मेलन में देश के 28 राज्यों, 3 केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा 6 विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी सहभागिता कर रहे हैं।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों का आचरण राजनीति से ऊपर उठकर पूर्णतः निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए पीठासीन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायिका के माध्यम से जनता की आकांक्षाएं और आवाज सदन तक पहुंचती हैं। ऐसे में राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही का सुचारु, मर्यादित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करना पीठासीन अधिकारियों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सदन की कार्यवाही के लिए निर्धारित एवं पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, ताकि सार्थक चर्चा संभव हो सके।
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि आज के डिजिटल युग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा सोशल मीडिया का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की नजर रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
सम्मेलन के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, विधानसभाओं की कार्यकुशलता बढ़ाने, नीति निर्माण में संवाद की भूमिका और सदन संचालन को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर गंभीर एवं उपयोगी चर्चा की जाएगी। यह सम्मेलन देश में लोकतांत्रिक परंपराओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।