पराली जलाने पर सख्त एक्शन: तहसीलदार और कृषि अधिकारी ने बुझाई आग, बिना SMS वाली कंबाइन हार्वेस्टर सीज

कानपुर देहात, 18 नवंबर। जिलाधिकारी कपिल सिंह के सख्त निर्देशों के बाद, कृषि विभाग ने कल (17 नवंबर) को पराली जलाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश गुप्ता और तहसीलदार अकबरपुर पवन कुमार सिंह की अगुवाई में टीम ने एक खेत में जलती पराली को बुझाया, वहीं बिना ‘सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम’ (SMS) के चल रही एक कंबाइन हार्वेस्टर को सीज कर दिया गया।

🔥 जलती पराली बुझाई, किसानों को दिलाई शपथ

जिला कृषि अधिकारी, तहसीलदार-अकबरपुर, नायब तहसीलदार नरेंद्र मिश्रा, और सहायक विकास अधिकारी-कृषि की टीम क्षेत्र भ्रमण पर थी। ग्राम कुर्वा खुर्द, विकासखंड सरवनखेड़ा में एक किसान द्वारा खेत में जलाई गई पराली को अधिकारियों ने मौके पर ही ग्रामीणों के सहयोग से बुझवाया। इस दौरान टीम ने कृषकों को जागरूक किया और भविष्य में पराली न जलाने की शपथ भी दिलाई।

🚜 बिना SMS वाली हार्वेस्टर सीज

तहसील अकबरपुर के राजस्व ग्राम खरका में अधिकारियों ने श्री प्रमोद कुमार मिश्रा के धान के खेत में कटाई कर रही एक कंबाइन हार्वेस्टर (सं. UP 92 AL 2137) को तत्काल सीज कर दिया। यह हार्वेस्टर बिना फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र (Super Straw Management System) के चलाई जा रही थी।

⚠️ पर्यावरण क्षतिपूर्ति और PM किसान निधि पर खतरा

अधिकारियों ने किसानों को चेतावनी देते हुए बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण को क्षति, मृदा स्वास्थ्य पर कुप्रभाव और मित्र कीटों का नाश होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पराली जलाने को दंडनीय अपराध घोषित किया है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) अधिनियम के तहत अर्थदंड का प्रावधान इस प्रकार है:

  • 2 एकड़ से कम: रु. 5,000/- प्रति घटना

  • 2 से 5 एकड़: रु. 10,000/- प्रति घटना

  • 5 एकड़ से अधिक: रु. 30,000/- प्रति घटना

उप कृषि निदेशक ने अपील की है कि किसान पराली कदापि न जलाएं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पराली/फसल अवशेष जलाने वाले कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं अन्य विभागीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।

🗑️ पराली दान या जैविक खाद बनाने की अपील

जिला कृषि अधिकारी ने कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs) और प्रगतिशील कृषकों से अपील की कि वे पराली को जलाने के बजाय निराश्रित गोवंश स्थलों पर दान करें अथवा उसे खेत पर ही सड़ाकर जैविक उर्वरक के रूप में प्रयोग करें।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल उन्हीं कंबाइन हार्वेस्टरों से कटाई कराएं जिनमें सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगा हो, अन्यथा हार्वेस्टर सीज करने के साथ-साथ किसान का भी उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी।

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