उरई/जालौन।
16 और 17 मार्च 2026 को कृषि विज्ञान केन्द्र रूरामल्लू, जालौन में एक दिवसीय माइक्रोइरीगेशन गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ प्रगतिशील कृषक लक्ष्मीनारायण चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अधिक या कम पानी दोनों ही पौधों के विकास में बाधक हो सकते हैं। उन्होंने कृषकों को पानी, उर्वरक और बीज की मात्रा में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों का लाभ उठाने का सुझाव दिया।
कृषि विज्ञान केन्द्र रूरामल्लू के अध्यक्ष डॉ. मो. मुस्तफा ने स्थानीय जलवायु के अनुकूल रोग प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती पर जोर दिया। इससे न केवल पौधों को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकेगा, बल्कि कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार की संभावना भी बढ़ेगी।
डॉ. मंजुल पाण्डेय ने फसल चक्र परिवर्तन और प्रतिरोधी प्रजातियों की खेती पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया। उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों जैसे कलर ट्रैप, लाइट ट्रैप और मल्चिंग के प्रयोग से कृषि लागत कम करने और कीट-पतंग व रोगों से फसलों को सुरक्षित रखने के महत्व को रेखांकित किया।
कृषि वैज्ञानिक श्री मारूफ अहमद ने खेती के साथ पशुपालन, जैविक उत्पाद जैसे धन जीवा मृत, वर्मी कम्पोस्ट आदि पर जोर दिया। वहीं, कृषि वैज्ञानिक श्रीमती राजकुमारी ने संतुलित आहार के महत्व और मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, कोदो के सेवन से स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
अंत में जिला उद्यान अधिकारी परवेज़ खान ने गोष्ठी में आए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
गोष्ठी ने कृषकों को जल संरक्षण, आधुनिक खेती पद्धतियों और जैविक उत्पादों के उपयोग से कृषि को लाभकारी बनाने के मार्ग पर प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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