नेपाल में वोटिंग की उम्र घटाने के बावजूद युवा उदासीन — लोकतंत्र में कम होती दिलचस्पी चिंता का कारण!

काठमांडू (एजेंसी):
नेपाल सरकार द्वारा मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने के फैसले के बावजूद युवाओं में वोट डालने को लेकर खास उत्साह नहीं देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ और निर्वाचन आयोग की पहल का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी बढ़ाना था, लेकिन आंकड़े उम्मीदों के उलट हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, नई पात्रता आयु लागू होने के बाद लगभग 3,16,660 नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा है। इसके बावजूद राजनीतिक दलों और चुनाव प्रचार अभियानों में युवाओं की भागीदारी बेहद सीमित रही है।


📊 आंकड़े बताते हैं घटती राजनीतिक दिलचस्पी

आयोग के मुताबिक, कुल मतदाताओं में 16 से 18 वर्ष के युवाओं की हिस्सेदारी 5% से भी कम है। यह दर्शाता है कि नेपाल के युवा राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से दूरी बना रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह रुझान नेपाल की लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए चुनौतीपूर्ण है।
राजनीति में बढ़ती भ्रष्टाचार की घटनाएं, बेरोजगारी और युवाओं का विदेश पलायन इस उदासीनता के प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।


🗳️ निर्वाचन आयोग की चिंता

निर्वाचन आयोग ने युवाओं के कम पंजीकरण पर चिंता जताई है।
आयोग के प्रवक्ता ने कहा, “हमने युवाओं के लिए विशेष अभियान शुरू किया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। युवाओं को लोकतंत्र की मजबूती में अपनी भूमिका समझनी होगी।”


🌍 विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि नेपाल के युवा अब वोट से ज्यादा नौकरी और प्रवास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछले एक दशक में लगभग 40 लाख नेपाली युवा विदेशों में नौकरी या पढ़ाई के लिए गए हैं, जिससे घरेलू राजनीतिक भागीदारी में गिरावट आई है।


🔍 निष्कर्ष

नेपाल में वोटिंग की उम्र घटाना एक सराहनीय कदम है, लेकिन युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और भरोसा बढ़ाए बिना यह बदलाव अधूरा साबित हो रहा है।

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