माधौगढ़ (जालौन)। माधौगढ़ क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिस भूमि पर कुछ समय पहले बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई थी, उसी स्थान पर अब दोबारा वृक्षारोपण अभियान शुरू किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी और चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले हजारों हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा। अब उसी भूमि पर नए पौधे लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से मौजूद पेड़ों का संरक्षण किया जाता, तो दोबारा वृक्षारोपण की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई और पुनः वृक्षारोपण की प्रक्रिया में सरकारी धन का अनावश्यक उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि वृक्षारोपण अभियान विभागीय योजना के अंतर्गत चलाया जा रहा है तथा सभी कार्य शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि किसी कारणवश पेड़ों की कटाई करनी पड़े, तो उसके पीछे स्पष्ट और वैध कारण होने चाहिए तथा क्षतिपूरक वृक्षारोपण प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भविष्य में बिना उचित कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर प्रभावी निगरानी रखी जाए। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पहले से मौजूद पेड़ों को बचाना भी उतना ही आवश्यक है।