नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि सड़कें आम जनता के आवागमन के लिए होती हैं और इन्हें किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए बाधित नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यदि किसी मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थल में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित पक्ष प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध कर सकता है। हालांकि, सार्वजनिक सड़क पर नमाज पढ़ना या किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि आयोजित करना उचित नहीं है।
यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित श्याम नगर मस्जिद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मस्जिद के बाहर सड़क संख्या 596 पर लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। इस पर अदालत ने कहा कि सड़क किसी एक समुदाय या धार्मिक आयोजन के लिए आरक्षित नहीं हो सकती और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि धार्मिक आयोजन के लिए अतिरिक्त स्थान की आवश्यकता है, तो संबंधित पक्ष प्रशासन के समक्ष उचित आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ आम नागरिकों के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
इस टिप्पणी को सार्वजनिक स्थानों के उपयोग और धार्मिक आयोजनों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है। अदालत ने दोहराया कि कानून व्यवस्था, यातायात और नागरिक सुविधाओं को प्रभावित किए बिना ही धार्मिक गतिविधियों का संचालन किया जाना चाहिए।