निरीक्षण में डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ नदारद, चार अप्रशिक्षित महिलाओं के भरोसे मरीजों का इलाज; आठ मरीज भर्ती मिले, बेड पर नहीं थीं चादरें
संवाददाता
कानपुर देहात।
जनपद के अकबरपुर स्थित प्रिशा हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग के औचक निरीक्षण के दौरान गंभीर खामियां सामने आई हैं। अस्पताल में न तो कोई पंजीकृत चिकित्सक मिला और न ही पंजीकृत प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद था। इसके बावजूद चार अप्रशिक्षित महिला कर्मचारियों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा था। निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के नवीनीकरण आवेदन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही, अस्पताल संचालक को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, कानपुर देहात की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को अपराह्न चार बजे प्रिशा हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान अस्पताल में आठ मरीज भर्ती मिले, लेकिन उनके बेड पर चादरें नहीं थीं। इस स्थिति ने अस्पताल की साफ-सफाई और मरीजों की देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं।
डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं मिला
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई पंजीकृत चिकित्सक और पंजीकृत प्रशिक्षित कर्मचारी उपस्थित नहीं मिला। इसके बावजूद चार अप्रशिक्षित महिला कर्मचारियों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है।
बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण में भी खामियां
जांच के दौरान जैव चिकित्सा अपशिष्ट (बायोमेडिकल वेस्ट) के रखरखाव और निस्तारण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। अस्पताल में कलर कोडेड डस्टबिन उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा शौचालय में गंदगी और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था का अभाव भी सामने आया।
पहले निरीक्षण में भी मिली थीं कमियां
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि तीन अक्टूबर 2026 को भी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. एसएल वर्मा ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। उस दौरान भी कमियां दर्ज की गई थीं। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।
तीन दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी नोटिस में अस्पताल संचालक को निर्देश दिया गया है कि नोटिस प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। पत्र पर नर्सिंग होम पंजीकरण एवं झोलाछाप से संबंधित नोडल अधिकारी, कानपुर देहात के हस्ताक्षर हैं। मामले की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से निजी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती, मरीजों की देखभाल और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब संचालक के स्पष्टीकरण के बाद विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।